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Friday, August 21, 2026
होमन्यूज़ अपडेटईरान-अमेरिका युद्ध का भारतीय शेयर बाजार पर असर, 1300 अंक लुढ़का सेंसेक्स

ईरान-अमेरिका युद्ध का भारतीय शेयर बाजार पर असर, 1300 अंक लुढ़का सेंसेक्स

कच्चे तेल की कीमतों में 7% वृद्धी

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ईरान-अमेरिका युद्ध जे चलते भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुवात भारी गिरावट के साथ हुई। सोमवार (2 मार्च)को दलाल स्ट्रीट खुलते ही बिकवाली हावी रही और प्रमुख सूचकांक तेज़ी से फिसल गए। सुबह 9:29 बजे तक S&P BSE Sensex 884.35 अंक टूटकर 80,402.84 पर आ गया, जबकि NSE Nifty50 267.45 अंक गिरकर 24,911.20 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में करीब 1,300 अंकों तक की गिरावट देखी गई। यह निफ्टी की 1 फरवरी के बाद और सेंसेक्स की 7 अप्रैल 2025 के बाद की सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट मानी जा रही है।

सप्ताहांत में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर समन्वित हमलों तथा ईरान की जवाबी मिसाइल और ड्रोन कार्रवाई की खबरों से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी। स्थिति सीमित झड़प से सक्रिय सैन्य युद्ध में बदल चुकी है, जिससे निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाई।

इसी बीच कमॉडिटी मार्केट में ब्रेंट क्रूड सोमवार (2 मार्च)को 7% से अधिक उछलकर करीब 82.40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। इससे पहले यह 72.8 डॉलर के सात माह के उच्च स्तर को छू चुका था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन पर रोक की घोषणा की है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% संभालता है और भारत के 40% से अधिक कच्चे तेल आयात इसी रास्ते से होते हैं। किसी भी व्यवधान से आपूर्ति संकट और कीमतों में और उछाल की आशंका है।

तेल कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई जोखिम बढ़ सकती है, जिससे सरकारी बॉन्ड यील्ड ऊपर जाती है। ऊंची यील्ड इक्विटी के आकर्षण को कम करती है। शुरुआती कारोबार में रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ।

विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी आशिया में युद्ध से जुड़ी अनिश्चितता जल्द ही मार्केट पर भारी पड़ेगी। मार्केट के नज़रिए से सबसे बड़ा रिस्क क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से होने वाला एनर्जी रिस्क है।

सभी 16 प्रमुख सेक्टोरल सूचकांक लाल निशान में रहे। निफ्टी स्मॉल-कैप 3.8% और मिड-कैप 3.4% गिरा। तेल विपणन कंपनियों, पेंट, टायर, एविएशन और केमिकल शेयरों पर दबाव रहा। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड 3.5% घटा, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड 2% घटा और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन 4% घटा।

विशेषज्ञों का कहना है ब्रेंट 80 डॉलर से ऊपर टिकता है या होर्मुज़ में गंभीर व्यवधान होता है, तो बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। सीमित जवाबी कार्रवाई से 5–10 डॉलर प्रति बैरल की और बढ़ोतरी संभव है, जबकि व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की स्थिति में कीमतें 100 डॉलर से ऊपर जा सकती हैं। फिलहाल भारतीय बाजारों के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर कच्चे तेल की दिशा और मध्य पूर्व के घटनाक्रम बने हुए हैं। जब तक तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिति पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक उतार-चढ़ाव जारी रहने की आशंका है।

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