बैठक में दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग पर व्यवस्था संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में आगे के सहयोग के लिए ढांचा उपलब्ध कराएगा।
दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने संयुक्त बयान में कहा कि भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी हिंद-प्रशांत में शांति, स्थिरता और समृद्धि के प्रमुख आधार हैं।
उन्होंने मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए रक्षा सहयोग और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों रक्षा मंत्रियों ने मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा स्थिति पर एक-दूसरे के आकलन साझा करने को महत्वपूर्ण बताया।
दोनों पक्ष समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक जहाजों और सैन्य इकाइयों की पारस्परिक यात्राएं बढ़ाएंगे। संयुक्त अभ्यास, सैन्यकर्मियों और विशेषज्ञों का आदान-प्रदान भी होगा।
दोनों पक्षों ने नौसैनिक जहाजों के संयुक्त विकास और डिजाइन की संभावनाएं तलाशने पर भी सहमति जताई है। इसमें जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल किया जाएगा। भारत व जापान ने रक्षा जहाज निर्माण से जुड़े क्षेत्रों में एक-दूसरे की क्षमताओं का लाभ उठाने पर जोर दिया।
दोनों मंत्रियों ने भारत-जापान के बीच लगातार बढ़ रहे सैन्य अभ्यासों का स्वागत किया। इसके तहत ‘धर्म गार्जियन’ और ‘जेमेक्स’ जैसे युद्धाभ्यासों का विस्तार किया जाएगा। इस साल होने वाले भारत-जापान वायुसेना अभ्यास ‘वीर गार्जियन 26’ की तैयारियों में हुई प्रगति का भी दोनों ने स्वागत किया है। इस अभ्यास में पहली बार जापान की वायु आत्मरक्षा सेना के लड़ाकू विमान भारत आएंगे और अभ्यास में हिस्सा लेंगे।
दोनों देशों ने सैन्य अभ्यासों को और जटिल बनाने, मानवरहित प्रणालियों को शामिल करने और अवसर मिलने पर कम समय में संयुक्त अभ्यास करने पर भी सहमति जताई है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जापान की ओर से रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के ढांचे की हालिया समीक्षा का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि जापान हिंद-प्रशांत और पूरी दुनिया में शांति एवं स्थिरता में आगे भी योगदान देगा। उन्होंने दोनों देशों के बीच रक्षा और प्रौद्योगिकी साझेदारी को और मजबूत करने की उम्मीद भी जताई।



