योगाभ्यास के दौरान शरीर के संकेतों को समझना और उसकी सीमाओं का सम्मान करना बेहद जरूरी है। इसी संदेश को रेखांकित करते हुए आयुष मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा कर योग करते समय बरती जाने वाली जरूरी सावधानियों के बारे में जानकारी दी है।
आयुष मंत्रालय ने अपनी पोस्ट में लिखा, “योग के अभ्यास के लिए जागरूकता, कंट्रोल और अपने शरीर की क्षमता का सम्मान करना जरूरी है। धीरे-धीरे अभ्यास करें, अपने मूवमेंट्स को सहज रखें और झटके, जोर या दबाव से बचें। अगर शरीर के किसी भी हिस्से में तेज दर्द हो, तो अभ्यास तुरंत बंद कर दें। हर मूवमेंट को जागरूकता के साथ करें और माइंडफुल प्रैक्टिस को अपने योग रूटीन का जरूरी हिस्सा बनाएं।”
मंत्रालय के मुताबिक, योग करते समय कई लोग शुरुआत में ही मुश्किल आसन करने की कोशिश करते हैं। उन्हें लगता है कि जितना ज्यादा शरीर को खींचेंगे, उतना ही जल्दी लचीलापन बढ़ेगा। लेकिन हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता अलग होती है। किसी का शरीर आसानी से आगे झुक सकता है, तो किसी को इसमें समय लग सकता है। ऐसे में दूसरे लोगों को देखकर अपने शरीर पर दबाव डालना सही नहीं है।
उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति आगे झुकने वाला आसन कर रहा है और उसका शरीर ज्यादा नहीं झुक पा रहा, तो उसे जबरदस्ती हाथों से पैरों को छूने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। वह अपनी सुविधा के अनुसार जितना झुक सकता है, उतना ही करे। नियमित अभ्यास से धीरे-धीरे शरीर की क्षमता में सुधार होगा।
अमेरिका के नेशनल सेंटर फॉर कॉम्प्लिमेंटरी एंड इंटीग्रेटिव हेल्थ के मुताबिक, शरीर के किसी भी हिस्से में तेज दर्द होने पर योग नहीं करना चाहिए। कई बार लोग आसन को पूरा करने के चक्कर में दर्द को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसा करने से मांसपेशियों, घुटनों, कंधों या पीठ पर चोट लगने का खतरा बढ़ सकता है। वहीं मोच या मांसपेशियों में खिंचाव जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
मंत्रालय ने योग के साथ माइंडफुल प्रैक्टिस यानी पूरी जागरूकता के साथ अभ्यास करने पर भी जोर दिया है। योग करते समय आपका ध्यान अपनी सांस, शरीर की स्थिति और उसके संकेतों पर भी होना चाहिए।



