शिवसेना (यूबीटी) ने सोमवार को कहा कि अरुणाचल प्रदेश सीमा पर चीनी घुसपैठ को लेकर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर की ओर से किए गए सनसनीखेज खुलासों के बाद एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है।
शिवसेना (यूबीटी) ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के एक संपादकीय में दावा किया है कि इन खुलासों ने सरकार के नैरेटिव को ध्वस्त कर दिया है। इससे सीमा की सुरक्षा से जुड़ी सच्चाइयों को जानबूझकर दबाने और राष्ट्रीय नेतृत्व की विफलता उजागर हुई है। संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि मोदी सरकार ने जानबूझकर इन गंभीर घटनाओं को जनता से छिपाने की कोशिश की है।
संपादकीय के अनुसार, पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को सरकारी सेंसरशिप का सामना करना पड़ा है क्योंकि इसमें 2020 की लद्दाख-गलवान झड़पों और अग्निपथ योजना का जिक्र है। संपादकीय में इन दोनों घटनाओं के एक साथ होने को सीमा पर तैनात भारतीय सैनिकों के बलिदान और उन्हें लगी चोटों का अपमान बताया गया है।
संपादकीय में सत्ताधारी नेतृत्व पर संकट के समय सैनिकों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए करने और बाद में उन्हें अकेला छोड़ देने का आरोप लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि सरकार ने पुलवामा हमले, पहलगाम नरसंहार और अरुणाचल प्रदेश में जारी चीनी घुसपैठ जैसी बड़ी सुरक्षा विफलताओं के लिए जवाबदेही से किनारा कर लिया है।
संपादकीय में जोर देकर कहा गया है कि जो नेतृत्व देश की सीमाओं की रक्षा करने में विफल रहता है, उसे लोकतांत्रिक तरीके से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।



