ईडी ने बताया कि आरएचएफएल और आरसीएफएल के खिलाफ जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा कई सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों की शिकायतों पर दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी।
ईडी के एक बयान के अनुसार, अब तक की जांच में पता चला है कि आरएचएफएल और आरसीएफएल द्वारा जुटाए गए 15,548 करोड़ रुपए के सार्वजनिक धन को रिलायंस अनिल अंबानी समूह के नियंत्रण वाली शेल और समूह कंपनियों के जाल के माध्यम से व्यवस्थित तरीके से दूसरी जगह भेजा गया (डायवर्ट किया गया)।
जांच एजेंसी ने बताया कि इस बार अटैच की गई संपत्तियों में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के पास मौजूद रिलायंस पावर लिमिटेड के इक्विटी शेयर और सासन पावर लिमिटेड तथा रिलायंस पावर लिमिटेड से प्राप्त होने वाली कुछ लोन राशि भी शामिल हैं।
ईडी वर्तमान में रिलायंस अनिल अंबानी समूह के खिलाफ पीएमएलए और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (एफईएमए) के तहत कई मामलों की जांच कर रही है। एजेंसी के मुताबिक, अब तक पीएमएलए के तहत 4 प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की जा चुकी हैं, जबकि एफईएमए के तहत तीन मामले दर्ज किए गए हैं।
ईडी ने बताया कि जांच के दौरान 80 से अधिक परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया गया।
नई संपत्तियों की कुर्की के बाद पीएमएलए के तहत रिलायंस अनिल अंबानी समूह के मामलों में कुल अटैच संपत्तियों का मूल्य 20,367 करोड़ रुपए पहुंच गया है। इसके अलावा, एफईएमए के तहत 77.86 करोड़ रुपए की अतिरिक्त संपत्तियां भी अटैच की गई हैं।
जांच एजेंसी ने बताया कि अब तक रिलायंस अनिल अंबानी समूह के आठ वरिष्ठ अधिकारियों और करीबी सहयोगियों को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया जा चुका है और सभी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी ने इन मामलों की तेजी से जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का भी गठन किया है।
गौरतलब है कि इसी सप्ताह ईडी ने ई-कॉम्प्लेक्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके एक निदेशक के आवास पर भी छापेमारी की थी, जिसमें रिलायंस अनिल अंबानी समूह के कथित नियंत्रण वाली संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों से जुड़े अहम सबूत बरामद किए गए थे।
ईडी के अनुसार, तलाशी के दौरान बैंक घोटाले से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज, अचल संपत्तियों के रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं।
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