इथियोपिया के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित हैली गुब्बी (Hayli Gubbi) ज्वालामुखी ने करीब 12,000 साल बाद विस्फोट किया, जिसके बाद उठी विशाल राख की परतें अब भारत तक पहुंच गई हैं। इसके चलते उड़ानों में देरी के साथ कई उड़ाने रद्द की गई है। साथ ही भारत में आसमान का गहरा व धुंधला होना, और मौसम में अचानक बदलाव जैसी स्थितियां उत्पन्न हो रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह एक दुर्लभ घटना है, क्योंकि हैली गुब्बी एक shield volcano है, जो सामान्यतः राख के ऊंचे स्तम्भ नहीं उगलता।
रविवार(23 नवंबर) सुबह हुए इस विस्फोट ने अफार क्षेत्र में दहशत फैला दी। स्थानीय निवासी अहमद अब्देला ने घटना को वर्णित करते हुए कहा कि यह “ऐसा महसूस हुआ जैसे अचानक कोई बम फट गया हो।” कई पर्यटक डनाकिल रेगिस्तान जाते समय राख से ढके आफ़डेरा क्षेत्र में फंस गए। सौभाग्य से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, हालांकि स्थानीय पशुपालक समुदाय आर्थिक नुकसान की आशंका जता रहे हैं।
स्थानीय अधिकारी मोहम्मद सैयद ने बताया,“अब तक इंसानी जान या पशुधन का नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन कई गांव राख से ढक गए हैं और जानवरों के खाने की समस्या खड़ी हो गई है।” विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षेत्र में इतनी ऊंची राख का स्तम्भ उठना बेहद दुर्लभ है। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल की वैज्ञानिक जूलियट बिग्स ने कहा,“इस तरह बड़ी छतरी जैसी राख की बादल संरचना यहां असामान्य है।”
विस्फोट के बाद राख के घने बादल रेड सी पार करते हुए यमन, ओमान, पाकिस्तान होते हुए भारत पहुंचे। सोमवार रात 11 बजे के आसपास दिल्ली के आसमान में यह राख दर्ज की गई, जो राजस्थान से होते हुए भारत में दाखिल हुई।
IndiaMetSky Weather के अनुसार, “राख का बादल जोधपुर–जैसलमेर क्षेत्र से प्रवेश कर 120–130 किमी/घंटा की रफ्तार से उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ रहा है। यह 25,000 से 45,000 फीट की ऊंचाई पर है, जिससे आसमान कुछ समय अजीब और धुंधला दिख सकता है।” सोमवार देर शाम तक यह बादल राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के ऊपर फैल चुका था। अनुमान है कि यह आगे गुजरात, उत्तर-पश्चिम महाराष्ट्र, पंजाब और हिमालयी क्षेत्रों को भी प्रभावित करेगा।
राख पहुंचते ही भारत के कई एयरलाइंस ने उड़ानें रद्द या डायवर्ट कीं है। DGCA ने निर्देश दिया कि राख प्रभावित क्षेत्रों और ऊंचाइयों से बचें। रूटिंग व फ्यूल प्लानिंग में बदलाव करें। किसी भी राख के टकराने की तुरंत रिपोर्ट करें। अकासा एयर ने जेद्दा, कुवैत और अबू धाबी की उड़ानें (24–25 नवंबर) रद्द की है। केएलएम ने एम्स्टर्डम–दिल्ली (KL 871) और वापसी (KL 872) रद्द की है। वही IndiGo ने सोमवार (24 नवंबर) को Kannur–Abu Dhabi 6E 1433 फ्लाइट को अहमदाबाद डायवर्ट किया था। इस बीच स्पाइस जेट का दुबई रूट प्रभावित हो सकता है, यात्रियों से फ्लाइट स्टेटस चेक करने को कहा। दरम्यान एयर इंडिया ने भी 24 और 25 नवंबर की कई उड़ानें रद्द।
DGCA के एक अधिकारी ने बताया है की, “यदि राख मंगलवार तक दिल्ली और जयपुर के ऊपर बैठ गई, तो भारतीय विमानन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।”
दिल्ली और हरियाणा में राख के बादलों ने हल्का धुंधलापन बढ़ाया है, जिससे आम लोगों में चिंता बढ़ी। हालांकि, IMD प्रमुख एम. मोहपात्रा ने कहा, “यह ऊंचाई पर है, इसलिए जमीन के स्तर पर प्रदूषण में बड़ा इजाफा नहीं होगा।” उन्होंने बताया कि मुख्य प्रभाव उड़ानों तक सीमित रहेगा, जबकि शहरों में आसमान और धुंधला व बादलों जैसा दिखेगा। तापमान में हल्की वृद्धि भी दर्ज हो सकती है।
फिर भी, दिल्ली का सामान्य प्रदूषण स्तर नियंत्रण में नहीं है। मंगलवार(25 नवंबर) सुबह AQI 328 (Very Poor) रहा, जबकि इंडिया गेट और कर्तव्य पथ पर धुआं और धुंध साफ दिखी। इथियोपियाई ज्वालामुखी का अचानक हुआ विस्फोट भारत के लिए एक अनोखी पर्यावरणीय व तकनीकी चुनौती बन गया है। राख का बादल उच्च स्तर पर होने के कारण जमीन पर बड़ा प्रदूषण संकट नहीं, लेकिन हवाई यातायात में भारी व्यवधान पैदा कर रहा है। आगे 24–48 घंटों तक आसमान का बदला रंग और उड़ानों की अनिश्चितता जारी रह सकती है।
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