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शेयर की कीमतों पर नहीं, बल्कि बिजनेस की मजबूत नींव पर दें ध्यान: एनएसई सीईओ!

उन्होंने कहा, "आपका असली बिजनेस आपके संचालन में है, शेयर की कीमत में नहीं। शेयर बाजार सिर्फ आपके कारोबार का प्रतिबिंब है, वह आपका कारोबार नहीं है।"

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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) आशीष कुमार चौहान ने शुक्रवार को निवेशकों और उद्यमियों से कहा कि उन्हें शेयर की कीमतों में रोजाना होने वाले उतार-चढ़ाव पर ध्यान देने के बजाय लाभदायक और टिकाऊ कारोबार खड़ा करने पर फोकस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय में किसी कंपनी की बाजार में असली कीमत उसके मजबूत कारोबारी प्रदर्शन से तय होती है।

आशीष चौहान ने कहा कि पूंजी बाजार भारत के उद्यमियों की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) से कहा कि वे अपने कारोबार का विस्तार करने के लिए शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने (पब्लिक लिस्टिंग) को एक रणनीतिक अवसर के रूप में देखें।

एनएसई में आयोजित जेआईटीओ इन्क्यूबेशन एंड इनोवेशन फाउंडेशन (जेआईआईएफ) के स्थापना दिवस कार्यक्रम में बोलते हुए चौहान ने कहा कि संस्थापकों को अपने व्यवसाय के संचालन और मुनाफे पर ध्यान देना चाहिए, न कि शेयर की रोजाना बदलती कीमतों पर।

उन्होंने कहा, “आपका असली बिजनेस आपके संचालन में है, शेयर की कीमत में नहीं। शेयर बाजार सिर्फ आपके कारोबार का प्रतिबिंब है, वह आपका कारोबार नहीं है।”

आशीष चौहान ने कहा कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से कंपनियों को कारोबार बढ़ाने के लिए पूंजी मिलती है, कॉरपोरेट गवर्नेंस मजबूत होती है, कंपनी की विश्वसनीयता बढ़ती है, अच्छे प्रतिभाशाली लोग जुड़ते हैं और प्रमोटर अपने कारोबार पर नियंत्रण भी बनाए रख सकते हैं।

उन्होंने कहा, “पब्लिक लिस्टिंग के जरिए संस्थापक बिना नियंत्रण छोड़े अपने कारोबार के विस्तार के लिए पूंजी जुटा सकते हैं। शुरुआत में प्रमोटर अपनी कंपनी की 25 प्रतिशत हिस्सेदारी बाजार में ला सकते हैं, जबकि 75 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने पास रख सकते हैं। जरूरत पड़ने पर बाद में धीरे-धीरे और हिस्सेदारी जारी की जा सकती है।”

उन्होंने यह भी कहा कि सूचीबद्ध होने से कंपनी की गवर्नेंस बेहतर होती है, निवेशकों का भरोसा बढ़ता है, विश्लेषकों (एनालिस्ट्स) का ध्यान मिलता है और बैंकों से लोन लेना भी आसान हो जाता है। चौहान ने कहा कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से भविष्य में उत्तराधिकार (सक्सेशन प्लानिंग) और परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति के बंटवारे की प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित और आसान हो जाती है।

उन्होंने कहा, “जब आप अपनी कंपनी को सूचीबद्ध करते हैं, तब शुरुआत में 75 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने पास रखते हैं और 25 प्रतिशत बाजार को देते हैं। बाद में जरूरत के अनुसार और हिस्सेदारी जारी की जा सकती है, लेकिन कंपनी का नियंत्रण आपके पास ही रहता है।”

आशीष चौहान ने कहा कि शेयर बाजार लाभदायक व्यवसायों को ऐसा मूल्यांकन प्रदान करता है, जो निजी स्तर पर संभव नहीं होता।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई कंपनी सालाना 2 करोड़ रुपए का मुनाफा कमा रही है, तो शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद उसका बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैपिटलाइजेशन) 40 से 50 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। इससे प्रमोटर के पास कारोबार बढ़ाने, नई पूंजी जुटाने, नए साझेदार जोड़ने और विस्तार करने के बेहतर अवसर उपलब्ध हो जाते हैं।

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