पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने अब एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने हिंद महासागर स्थित रणनीतिक सैन्य अड्डे डियागो गार्सिया को निशाना बनाते हुए दो इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) दागीं।
युद्ध की शुरुआत के बाद यह पहली बार है जब ईरान ने इतनी दुरी पर लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य ठिकाने को सीधे निशाना बनाया है। इससे ईरान की लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता उजागर हुई है, जिसे लगभग 4000 किलोमीटर तक माना जा रहा है जो कि सेज्जिल मिसाइल जैसे ज्ञात मिसाइल सिस्टम से कहीं अधिक है।
हालांकि, दोनों मिसाइलें अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकीं। एक मिसाइल कथित तौर पर बीच रास्ते में ही विफल हो गई, जबकि दूसरी को इंटरसेप्ट कर निष्क्रिय कर दिया गया। इस हमले में किसी प्रकार के नुकसान या हताहत की पुष्टि नहीं हुई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब ब्रिटेन ने हाल ही में अमेरिका को डिएगो गार्सिया बेस के उपयोग की अनुमति दी थी, जहां से B-2 स्पीरिट बमवर्षकों के जरिए ईरान के मिसाइल ठिकानों पर हमले किए जाने की चर्चा है। पिछले कुछ हफ्तों में ईरान द्वारा इजराइल, खाड़ी देशों और अमेरिकी ठिकानों पर लगातार मिसाइल हमलों के बाद तनाव काफी बढ़ गया है।
इससे पहले भी हिंद महासागर इस संघर्ष का हिस्सा बन चुका है, जब अमेरिकी नौसेना की पनडुब्बी USS शेर्लोट (SSN-766) ने 4 मार्च की सुबह IRIS डेना को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया था। यह घटना श्रीलंकाई जलक्षेत्र में हुई थी, जिसमें 87 ईरानी नाविकों की मौत हो गई, जबकि 32 को बचा लिया गया।
हालिया घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि संघर्ष अब पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकलकर समुद्री और दूरस्थ सैन्य ठिकानों तक फैल चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिएगो गार्सिया पर हमला ईरान की रणनीतिक मंशा और उसकी सैन्य क्षमता दोनों को दर्शाता है।
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