ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच 4 बैक-चैनल बैठकें: रिपोर्ट में खुलासा

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच 4 बैक-चैनल बैठकें: रिपोर्ट में खुलासा

Four back-channel meetings between India and Pakistan after Operation Sindoor: Report reveals

भारत और पाकिस्तान के बीच आधिकारिक स्तर पर संवाद ठप रहने के बावजूद दोनों देशों के बीच बैक-चैनल संपर्क जारी रहने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच चार दौर की ट्रैक 1.5 और ट्रैक 2 वार्ताएं हुई हैं। यह बैठकें ऐसे समय में आयोजित की गईं जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच औपचारिक सरकारी संवाद लगभग पूरी तरह ठप हो गया था। इन वार्ताओं को सार्वजनिक नहीं किया गया और इन्हें गोपनीय तरीके से आयोजित किया गया।

बताया गया है कि इन बैठकों में दोनों देशों के वर्तमान और पूर्व अधिकारी, रणनीतिक विशेषज्ञ और कुछ सांसद शामिल हुए। इनका आयोजन विभिन्न थिंक टैंकों द्वारा किया गया था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

कहां-कहां हुईं बैठकें

रिपोर्ट के अनुसार, पहली बैठक लंदन में हुई थी, जो पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के कुछ ही समय बाद आयोजित की गई। इस ट्रैक 1.5 वार्ता में दोनों देशों के पूर्व अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए। बताया गया है कि शुरुआती चर्चा काफी तीखी रही, जबकि बाद की बैठकों में माहौल अपेक्षाकृत शांत रहा।

दूसरी बैठक ओमान की राजधानी मस्कट में अक्टूबर में आयोजित हुई, जिसे एक अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक ने आयोजित किया। इसके बाद तीसरी बैठक दिसंबर में थाईलैंड में ‘ट्रैक 2’ प्रारूप में हुई, जहां गैर-सरकारी स्तर पर संवाद हुआ।चौथी बैठक फरवरी में कतर की राजधानी दोहा में हुई, जो भी ट्रैक 2 वार्ता का हिस्सा थी।

क्या होती हैं ट्रैक 1.5 और ट्रैक 2 वार्ताएं

ट्रैक 1.5 वार्ता में सरकारी और गैर-सरकारी दोनों तरह के प्रतिनिधि शामिल होते हैं, जबकि ट्रैक 2 वार्ताएं पूरी तरह अनौपचारिक होती हैं, जिनमें पूर्व अधिकारी, विशेषज्ञ और थिंक टैंक प्रतिनिधि भाग लेते हैं। इनका उद्देश्य औपचारिक बातचीत के अभाव में संवाद बनाए रखना और संभावित समाधान तलाशना होता है।

ऐसी वार्ताएं आमतौर पर ‘चैथम हाउस नियम’ के तहत आयोजित की जाती हैं, जिससे प्रतिभागियों को गोपनीयता और खुलकर बातचीत करने की सुविधा मिलती है। भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं, खासकर आतंकवाद और सीमा सुरक्षा के मुद्दों को लेकर। ऐसे में बैक-चैनल वार्ताएं दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने का एक माध्यम मानी जाती हैं।

हालांकि, इन बैठकों के ठोस परिणामों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल भविष्य में औपचारिक बातचीत का रास्ता खोल सकती है।

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