1970 के दशक में सैटेलाइट्स के जरिए इनका पहली बार पता चला था। दशकों की रिसर्च के बाद अब वैज्ञानिक समझ गए हैं कि ये विस्फोट बहुत दूर करोड़ों प्रकाश वर्ष दूर होते हैं, फिर भी इतनी शक्तिशाली ऊर्जा छोड़ते हैं कि उन्हें पृथ्वी से आसानी से देखा जा सकता है।
गामा-रे बर्स्ट दो प्रकार के होते हैं। पहला शॉर्ट गामा-रे बर्स्ट या शॉर्ट जीआरबीएस इनका विस्फोट दो सेकंड से भी कम समय तक रहता है। ये मुख्य रूप से न्यूट्रॉन तारों की टक्कर या न्यूट्रॉन तारा और ब्लैक होल के आपस में मिलने से होते हैं।
अब सवाल है कि ये धमाके कैसे होते हैं? तो बता दें कि दोनों ही मामलों में नया बना ब्लैकहोल बेहद तेज गति वाली कणों की संकरी किरणें यानी जेट दोनों विपरीत दिशाओं में छोड़ता है। ये जेट प्रकाश की गति के करीब चलते हैं।
खास बात है कि वैज्ञानिकों को जीआरबीएस की सबसे ज्यादा जानकारी इन्हीं आफ्टरग्लो से मिलती है, जिन्हें कई दिनों या वर्षों तक ट्रैक किया जा सकता है। गामा-रे बर्स्ट न सिर्फ ब्रह्मांड की सबसे खतरनाक घटनाएं हैं बल्कि ये ब्लैक होल, न्यूट्रॉन स्टार और विशाल तारों की मौत जैसे रहस्यों को समझने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वैज्ञानिक अभी भी इनकी कई पहेलियों को सुलझाने में जुटे हुए हैं।
अजय आलोक का राहुल गांधी पर तंज, नीट का फुल फॉर्म तक नहीं पता!
