उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महिलाओं ने गणेश महोत्सव और हरतालिका तीज के लिए गाय के गोबर से भगवान गणेश और शिव-पार्वती की इको-फ्रेंडली मूर्तियां बनाईं। इस पहल का मकसद पर्यावरण संरक्षण और पेड़ों की सुरक्षा को बढ़ावा देना है। वहीं, गुजरात के जामनगर में बड़ी संख्या ईको-फ्रेंडली मूर्तियां बनकर तैयार हैं।
प्रयागराज की मूर्तिकार आभा सिंह ने आईएएनएस से कहा, “गणेश चतुर्थी और तीज आने वाला है, इसलिए हमने पर्यावरण से जुड़ी कोई चीज करने के बारे में सोचा। त्योहारों के दौरान बहुत ज्यादा कचरा पैदा होता है। इसलिए हमारे ग्रुप की महिलाओं ने तय किया कि इस बार गणेश और लक्ष्मी की मूर्तियों के साथ-साथ हम गाय के गोबर से गौरी-पार्वती की मूर्तियां भी बनाएंगी।
गाय में लक्ष्मी जी का निवास होता है, ऐसे में उनके गोबर से मूर्ति बनाते हैं। गाय के गोबर से बनी मूर्ति बहुत पवित्र और पूज्यनीय होती है। ऐसी मूर्तियां आसानी से पानी में मिल सकती हैं। ऐसी मूर्तियों को पूरे साल भी घर में रखा जा सकता है।”
प्रयागराज की रेणु कंचन ने कहा, “गणेश चतुर्थी और हरितालिका तीज पर भगवान गणेश और भगवान शिव शंकर-पार्वती की पूजा करते हैं। त्योहार के बाद भगवान की मूर्तियों का विसर्जन करते दुख होता है। इसलिए हमने सोचा कि गाय के गोबर से मूर्तियां बनाई जाएं। इन मूर्तियों को हम लोग घर में ही विसर्जित करके और खाद बनाकर गमलों में डाल देते हैं।”
जामनगर, गुजरात: इस साल मिट्टी से बनी 5,500 से अधिक इको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियां तैयार की गई हैं। इनमें हलारी पगड़ी पहने गणेश की मूर्तियां मुख्य आकर्षण बनी हुई हैं और लगभग 85 फीसदी बुकिंग पूरी हो चुकी है।
जामनगर के मूर्तिकार अतुल प्रजापति ने कहा, “मैं पिछले 20 साल से गुलाबनगर में मूर्तियां बना रहा हूं। गणेश चतुर्थी के छह महीने पहले परिवार के 6 सदस्य मिट्टी से गणेश की मूर्ति बनाना शुरू कर देते हैं। मूर्तियों में तीन प्रकार की मिट्टियों का उपयोग करते हैं। हमने 5500 से अधिक मूर्तियां बनाई है, इनमें 276 स्वरूप हैं।



