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‘मेक इन इंडिया’ को नई उड़ान: HAL भारत में बनाएगा रूसी SJ-100 यात्री विमान!

UAC के साथ समझौता

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भारत के विमान इतिहास में करीब चार दशक बाद एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। सरकारी एयरोस्पेस कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (UAC) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत भारत में SJ-100 सिविल पैसेंजर विमान का निर्माण किया जाएगा। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन माना जा रहा है।

यह परियोजना न केवल भारत की तकनीकी क्षमता को नई दिशा देगी, बल्कि यह देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में चार दशकों बाद पहली बार पूर्ण रूप से यात्री विमान निर्माण का प्रतीक बनेगी। इससे पहले HAL ने AVRO HS748 विमान का निर्माण 1961 से 1988 तक किया था।

HAL के अनुसार, SJ-100 विमान का उत्पादन भारत में घरेलू ग्राहकों के लिए किया जाएगा। ये विमान विशेष रूप से UDAN (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के तहत क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने में उपयोग किए जाएंगे। HAL ने अपने बयान में कहा, “SJ-100 विमान का निर्माण भारतीय विमानन उद्योग के इतिहास में एक नया अध्याय खोलेगा। यह नागरिक उड्डयन क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।”

कंपनी ने यह भी बताया कि स्थानीय निर्माण से न केवल सरकारी क्षेत्र बल्कि निजी एयरोस्पेस उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।

रूस में विकसित SJ-100 (Sukhoi Superjet 100) एक ट्विन-इंजन नैरो-बॉडी कम्यूटर विमान है, जो मुख्यतः व्यावसायिक उड़ानों में उपयोग होता है। अब तक रूस की UAC द्वारा 200 से अधिक SJ-100 विमान बनाए जा चुके हैं, जिन्हें 16 से अधिक वाणिज्यिक एयरलाइन ऑपरेटरों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है।

यह विमान शॉर्ट-हॉल (कम दूरी की उड़ानों) के लिए आदर्श है और भारत जैसे विशाल भौगोलिक देश में क्षेत्रीय हवाई संपर्क (regional air connectivity) बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

वर्तमान में भारत का विमानन बाजार दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते बाजारों में से एक है। एयर इंडिया और इंडिगो जैसी प्रमुख एयरलाइनों ने अपने फ्लीट में 1000 से अधिक नए विमान जोड़ने की योजना बनाई है। HAL का अनुमान है कि अगले दस वर्षों में भारत को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए कम से कम 200 नए जेट विमानों की आवश्यकता होगी। ऐसे में SJ-100 का स्थानीय उत्पादन भारत को विदेशी निर्भरता से काफी हद तक मुक्त करेगा।

SJ-100 का भारतीय संस्करण विशेष रूप से UDAN योजना को मजबूत करेगा, जिसका लक्ष्य छोटे शहरों और दूरस्थ क्षेत्रों को हवाई नेटवर्क से जोड़ना है। इस योजना की शुरुआत 2016 में की गई थी और तब से भारत में रीजनल एयर कनेक्टिविटी की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है।

HAL और UAC के बीच यह समझौता न केवल भारत के एयरोस्पेस इतिहास का मील का पत्थर है, बल्कि यह देश की प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन की दिशा में एक निर्णायक कदम भी है। ‘मेक इन इंडिया’ को सशक्त करते हुए, यह परियोजना आने वाले वर्षों में भारत को घरेलू यात्री विमान निर्माण वाले चुनिंदा देशों की सूची में शामिल कर देगी।

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