अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड कब्जाने की सनक ने मुद्दे को और भी गरमाया है। डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर विवादास्पद बयान देते हुए कहा है कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार न दिया जाना अब उन्हें सिर्फ शांति के बारे में सोचने के दायित्व से मुक्त करता है। उनके इस बयान का अर्थ ऐसे भी निकला जा रहा है की वह अब युद्ध करने के लिए भी सोच सकतें है। ट्रंप ने इसी तर्क के आधार पर डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की अपनी मांग को दोहराया है। यह जानकारी PBS न्यूज़ के हवाले से सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने यह बातें नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे को लिखे एक पत्र में कही हैं। यह पत्र अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (NSC) द्वारा वॉशिंगटन डीसी में तैनात यूरोपीय राजदूतों को भी भेजा गया। PBS के पत्रकार निक शिफ्रिन के मुताबिक, ट्रंप ने पत्र में लिखा, “प्रिय जोनास, यह देखते हुए कि आपके देश ने मुझे आठ युद्धों को रोकने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार देने का फैसला नहीं किया, अब मुझे केवल शांति के बारे में सोचने का दायित्व नहीं लगता, हालांकि यह हमेशा प्रमुख रहेगा, लेकिन अब मैं इस बारे में भी सोच सकता हूं कि संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए क्या अच्छा और उचित है।”
NEW: @potus letter to @jonasgahrstore links @NobelPrize to Greenland, reiterates threats, and is forwarded by the NSC staff to multiple European ambassadors in Washington. I obtained the text from multiple officials:
Dear Ambassador:
President Trump has asked that the…— Nick Schifrin (@nickschifrin) January 19, 2026
इसके बाद ट्रंप ने सीधे ग्रीनलैंड के मुद्दे पर रुख किया और डेनमार्क की संप्रभुता को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “डेनमार्क उस जमीन को रूस या चीन से नहीं बचा सकता, और वैसे भी उनके पास ‘मालिकाना हक’ क्यों है? कोई लिखित दस्तावेज नहीं हैं, बस इतना है कि सैकड़ों साल पहले वहां एक नाव उतरी थी, लेकिन हमारी नावें भी वहां उतरी थीं।” ट्रंप ने नाटो से ग्रीनलैंड को सौंपने की मांग करते हुए कहा, “जब तक हमारे पास ग्रीनलैंड का पूर्ण और सम्पूर्ण नियंत्रण नहीं होगा, तब तक दुनिया सुरक्षित नहीं है।”
ट्रंप और उनके सहयोगियों ने ग्रीनलैंड पर कब्जे के अभियान को और तेज कर दिया है। शनिवार (17 जनवरी) को ट्रंप ने डेनमार्क और उन सात अन्य यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जिन्होंने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण के अभियान का विरोध किया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि जून तक ग्रीनलैंड का नियंत्रण अमेरिका को नहीं सौंपा गया, तो यह टैरिफ बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
बता दें की, ग्रीनलैंड नाटो के ही एक सदस्य देश डेनमार्क का हिस्सा है, उस पर बार-बार कब्जे की धमकी और सहयोगी देशों पर दंडात्मक टैरिफ की घोषणा ने नाटो गठबंधन में गंभीर तनाव पैदा कर दिया है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा है कि यदि अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर सैन्य कार्रवाई की, तो नाटो मृत हो जाएगा।
ट्रंप की धमकियों के बीच, पिछले सप्ताह जर्मनी, स्वीडन, फ्रांस और नॉर्वे ने डेनमार्क के साथ मिलकर ग्रीनलैंड में सैन्य कर्मियों की तैनाती की है, ताकि द्वीप की रक्षा को मजबूत किया जा सके। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी घोषणा की कि फ्रांस ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए थल, वायु और समुद्री संसाधन तैनात करेगा। ट्रंप का नाम लिए बिना मैक्रों ने दुनिया में सक्रिय हो रहे नए उपनिवेशवाद की आलोचना भी की।
इस बीच, ट्रंप द्वारा टैरिफ युद्ध के जरिए दबाव बढ़ाए जाने के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूरोपीय संघ से 2023 में अपनाए गए ‘एंटी-कोएरशन इंस्ट्रूमेंट’ (ACI) को लागू करने की मांग की है। इस प्रावधान को ‘ट्रेड बाजूका’ भी कहा जाता है और इसके तहत EU आर्थिक ब्लैकमेल करने वाले देशों के खिलाफ व्यापार लाइसेंस सीमित करने और सिंगल मार्केट तक पहुंच रोकने जैसे कदम उठा सकता है।
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