उनकी कोई पहली हिंदी फिल्म रिलीज भी नहीं हुई थी, तब निर्माता ने उन्हें ‘ड्रीम गर्ल’ के रूप में पेश करना शुरू कर दिया था। वर्षों बाद खुद हेमा मालिनी ने इस दिलचस्प किस्से का खुलासा किया और बताया कि कैसे एक निर्माता की सोच ने उनकी पूरी जिंदगी की पहचान तय कर दी।
हेमा मालिनी ने यह खुलासा कॉमेडियन कपिल शर्मा के शो ‘द कपिल शर्मा शो’ में किया था। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया, ”जब मेरी पहली हिंदी फिल्म ‘सपनों का सौदागर’ रिलीज होने वाली थी, तब फिल्म के निर्माता बी. आनंदस्वामी ने प्रमोशन के लिए एक अलग रणनीति बनाई। उन्होंने हर जगह ‘ड्रीम गर्ल कमिंग टू टाउन’ लिखवाना शुरू कर दिया। उस समय कहीं भी मेरा नाम नहीं लिखा जाता था। यह देखकर मैं खुद हैरान थीं कि आखिर मेरा नाम क्यों नहीं दिख रहा है।”
हेमा मालिनी ने बताया, ”मैंने निर्माता से इस बारे में सवाल भी किया था तब निर्माता ने मुझसे कहा- ”यही तुम्हारी नई पहचान बनने वाली है। पहले लोगों के बीच ‘ड्रीम गर्ल’ का नाम लोकप्रिय होगा और बाद में बताया जाएगा कि यह ‘ड्रीम गर्ल’ आखिर है कौन। इसके बाद तुम्हारा नाम सामने लाया जाएगा।’ निर्माता की यह योजना सफल रही और देखते ही देखते लोग मुझे ‘ड्रीम गर्ल’ के नाम से पहचानने लगे।”
साल 1968 में रिलीज हुई ‘सपनों का सौदागर’ हेमा मालिनी की पहली हिंदी फिल्म थी। इस फिल्म का निर्देशन महेश कौल ने किया था, जबकि निर्माता बी. आनंदस्वामी थे। फिल्म में उनके साथ हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता राज कपूर मुख्य भूमिका में नजर आए थे।
दिलचस्प बात यह रही कि करीब नौ साल बाद साल 1977 में हेमा मालिनी ने ‘ड्रीम गर्ल’ नाम की फिल्म में भी मुख्य भूमिका निभाई। इस फिल्म का निर्देशन प्रमोद चक्रवर्ती ने किया था।
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