कांडला पोर्ट से भारत ने निर्यात किए सबसे बड़े क्रायोजेनिक LNG टैंक

वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ी हिस्सेदारी

कांडला पोर्ट से भारत ने निर्यात किए सबसे बड़े क्रायोजेनिक LNG टैंक

India exporta el tanque criogénico de GNL más grande desde el puerto de Kandla.

भारत ने वैश्विक ऊर्जा अवसंरचना में अपनी उभरती भूमिका प्रदर्शित करते हुए महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण (कांडला पोर्ट) से देश के अब तक के सबसे बड़े क्रायोजेनिक एलएनजी स्टोरेज टैंकों का सफल निर्यात किया गया है। ये टैंक आईनॉक्स इंडिया लिमिटेड द्वारा निर्मित किए गए हैं और इन्हें बहामास की राजधानी नासाउ में बन रहे एक मिनी-LNG टर्मिनल प्रोजेक्ट के लिए भेजा गया है। यह परियोजना द्वीपीय क्षेत्रों में बिजली उत्पादन को समर्थन देने के लिए तैयार की जा रही है।

इस प्रोजेक्ट के तहत कुल 10 उच्च क्षमता वाले क्रायोजेनिक टैंक निर्यात किए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 1500 घन मीटर है। इन टैंकों के साथ एक रीगैसिफिकेशन सिस्टम भी शामिल है, जो एलएनजी को गैस में बदलने का काम करेगा।

यह टैंक वैक्यूम-इंसुलेटेड और डबल-वॉल्ड डिजाइन पर आधारित हैं, जिन्हें दुनिया के सबसे बड़े “शॉप-बिल्ट” क्रायोजेनिक स्टोरेज यूनिट्स में गिना जा रहा है। इस तरह की इंजीनियरिंग में उच्च स्तर की सटीकता और उन्नत निर्माण तकनीक की आवश्यकता होती है।

इस बड़े और जटिल कार्गो को संभालना कांडला बंदरगाह की मजबूत बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक क्षमता को दर्शाता है। इस तरह के ओवर-डायमेंशनल उपकरणों की सुरक्षित ढुलाई भारत के बंदरगाहों की वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मकता को भी दिखाती है।

यह उपलब्धि केवल तकनीकी नहीं, बल्कि रणनीतिक भी मानी जा रही है। इस निर्यात के जरिए भारत ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूत करते हुए खुद को ऊर्जा क्षेत्र में एक वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

बहामास में विकसित हो रहा यह मिनी-LNG टर्मिनल प्रोजेक्ट इस बात का उदाहरण है कि भारतीय तकनीक और निर्माण क्षमता अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा बन रही है। यह कदम भारत की तकनीकी दक्षता के साथ यह भी दिखाता है कि देश अब जटिल और उच्च प्रभाव वाली अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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