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भारत-जापान संबंधों का सफर: 1952 से ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ तक

1970 के दशक से जापानी कंपनियों ने भारत में निवेश शुरू किया।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (29 अगस्त) से दो दिन की जापान यात्रा पर हैं, जहां वे जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों नेता क्रिटिकल मिनरल्स और जापानी निवेश जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे। लेकिन यह संबंध आज जिस मुकाम पर हैं, वह एक लंबी ऐतिहासिक यात्रा का नतीजा है।

भारत और जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 28 अप्रैल 1952 को शांति संधि पर हस्ताक्षर कर राजनयिक संबंधों की शुरुआत की। इसके बाद उच्च-स्तरीय दौरों का सिलसिला चला। 1957 में जापान के पीएम किशी नोबुसुके भारत आए, 1960 में क्राउन प्रिंस अकिहितो और प्रिंसेस मिचिको ने दौरा किया। वहीं भारत से जवाहरलाल नेहरू और राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने भी जापान का दौरा किया।

अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में 2000 में रिश्तों को ग्लोबल पार्टनरशिप का दर्जा मिला। 2006 में मनमोहन सिंह ने इसे स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप तक पहुंचाया। 2014 में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने पर यह संबंध और गहरे हुए और इन्हें स्पेशल स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप में बदला गया।

रक्षा सहयोग:

2015 में भारत और जापान ने डिफेंस इक्विपमेंट और टेक्नोलॉजी कोऑपरेशन और क्लासिफाइड मिलिट्री इंफॉर्मेशन पर अहम समझौते किए। 2017 में एक्ट ईस्ट फोरम बना। 2019 में पहला 2+2 डायलॉग हुआ और 2020 में लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए। आज जापान मालाबार नेवल एक्सरसाइज का स्थायी हिस्सा है।

व्यापार और निवेश:

1970 के दशक से जापानी कंपनियों ने भारत में निवेश शुरू किया। सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन ने 1980 के दशक में भारतीय ऑटो सेक्टर को नई पहचान दी। 2011 में दोनों देशों ने कम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) पर हस्ताक्षर किए।

वर्तमान में दोनों देशों का व्यापार 2023-24 में लगभग $22.85 बिलियन का है। जापान भारत का पांचवां सबसे बड़ा निवेशक है और 2000 से अब तक उसने करीब $43.2 बिलियन का एफडीआई किया है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन और दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसे मेगा प्रोजेक्ट इसी निवेश का हिस्सा हैं।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी और संस्कृति:

2023 में भारत-जापान ने सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पार्टनरशिप साइन की। इसके अलावा 5G, AI और क्वांटम कंप्यूटिंग पर भी सहयोग बढ़ रहा है। सांस्कृतिक रूप से दोनों देशों का रिश्ता प्राचीन काल से है जब भारत के जरिए जापान को बौद्ध धर्म मिला। आधुनिक दौर में स्वामी विवेकानंद, टैगोर और नेताजी सुभाष बोस जैसे नेताओं ने इस संबंध को और गहराई दी।

पर्यटन और जनसंपर्क:

जापान में करीब 40,000 भारतीय रहते हैं और टोक्यो का निशिकासाई इलाका “मिनी इंडिया” के नाम से प्रसिद्ध है। वहीं जापान में भारतीय पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है—2024 में 2.33 लाख भारतीयों ने जापान का दौरा किया, जो 2023 से 40% अधिक था।

भारत-जापान संबंध 1952 से लगातार मजबूत होते आए हैं। आज यह रिश्ता सिर्फ आर्थिक और रक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी भी लगातार वृद्धींगत हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदा जापान यात्रा से इन संबंधों में और नई ऊर्जा आने की उम्मीद है।

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