28 C
Mumbai
Sunday, May 3, 2026
होमदेश दुनिया"जहां से सबसे सस्ता तेल मिलेगा, वहीं से खरीदेंगे"

“जहां से सबसे सस्ता तेल मिलेगा, वहीं से खरीदेंगे”

भारत ने दोहराया रुख

Google News Follow

Related

नई दिल्ली के रूस में राजदूत विनय कुमार ने साफ कहा है कि भारतीय कंपनियां तेल खरीदने के फैसले पूरी तरह कारोबारी आधार पर करती हैं और जहां से सबसे अच्छा सौदा मिलेगा, वहीं से तेल खरीदेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा नीति किसी बाहरी दबाव से नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाई जाती है।

रूसी समाचार एजेंसी TASS से बातचीत में कुमार ने अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए दोगुने शुल्क को अनुचित, अन्यायपूर्ण और गैर-तर्कसंगत बताया। हाल ही में वाशिंगटन ने भारतीय आयात पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया था, जिससे कुल शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है। कुमार के अनुसार, “यह कदम निष्पक्ष व्यापार के सिद्धांतों के खिलाफ है और भारत के हितों को नुकसान पहुंचाने वाला है।”

उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा है। रूस और अन्य देशों के साथ भारत का सहयोग वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लाने में मदद करता है।” उन्होंने दोहराया कि सरकार हमेशा वही कदम उठाएगी, जिससे देश का राष्ट्रीय हित सुरक्षित रहे। कुमार ने स्पष्ट कहा कि भारत की तेल खरीद-नीति पूरी तरह से वाणिज्यिक लेन-देन पर आधारित है। “अगर सौदे के लिहाज से स्थिति सही रहती है, तो भारतीय कंपनियां वही करेंगी, जो देश के लिए फायदेमंद होगा,” उन्होंने जोड़ा।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भारत बार-बार अपने रूसी तेल आयात का बचाव कर चुका है। अधिकारियों का कहना है कि सस्ती ऊर्जा भारत की आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है, और यह भी तथ्य है कि अमेरिका और यूरोप समेत कई देश अभी भी रूस के साथ कुछ हद तक व्यापार कर रहे हैं।

राजदूत के बयान विदेश मंत्री एस. जयशंकर की टिप्पणियों की गूंज थे। जयशंकर ने भी शनिवार को अमेरिका की ओर से लगाए गए अतिरिक्त शुल्क को “अनुचित और गैर-तर्कसंगत” करार दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि भारत अपने किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों से समझौता नहीं करेगा।

भुगतान प्रणाली पर उठी आशंकाओं को लेकर कुमार ने कहा कि दोनों देशों ने राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार निपटान के लिए एक स्थिर व्यवस्था बना ली है। “भारत और रूस के बीच भुगतान को लेकर अब कोई समस्या नहीं है,” उन्होंने बताया। 2022 के बाद से पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने रूस से तेल आयात में उल्लेखनीय वृद्धि की है। हालांकि द्विपक्षीय व्यापार का बड़ा हिस्सा तेल आयात पर आधारित है, लेकिन रूस के बाजार में भारत का निर्यात अब भी सीमित है।

इस बयान से एक बार फिर यह स्पष्ट हो गया है कि भारत ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है, चाहे अंतरराष्ट्रीय दबाव कितना भी क्यों न हो।

यह भी पढ़ें:

स्मृति शेष: नील आर्मस्ट्रांग, दुनिया के पहले शख्स जिन्होंने चांद पर रखा कदम!

भारत में मछली उत्पादन दोगुना, एक दशक में 104% की छलांग

गणेश चतुर्थी : बाप्पा से सीखें नेतृत्व और सजग जीवन के सूत्र

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

The reCAPTCHA verification period has expired. Please reload the page.

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,109फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
304,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें