भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि यूक्रेन में जारी युद्ध को समाप्त करने का रास्ता केवल बातचीत और कूटनीति से ही निकल सकता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि संघर्ष के कारण ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और अन्य वैश्विक परिणामों का बोझ खासकर वैश्विक दक्षिण के देशों पर पड़ा है, जिन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया गया है।
हरीश ने गुरुवार (4 सितंबर)को महासभा को संबोधित करते हुए कहा, “हमने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अलास्का में हुई शिखर बैठक का समर्थन किया। हम इस सम्मेलन में हुई प्रगति की सराहना करते हैं। भारत शांति की दिशा में हाल के सकारात्मक घटनाक्रमों का स्वागत करता है।”
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार शांति बहाली के प्रयासों में सक्रिय रहे हैं। पीएम मोदी की बातचीत यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और यूरोपीय नेताओं के साथ हुई है, जिससे समाधान की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं। पुतिन से मुलाकात से पहले ही जेलेंस्की ने मोदी से बात की थी और सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे रूसी नेता से मिलने के लिए तैयार हैं।
अलास्का बैठक के बाद ट्रंप ने यूरोपीय नेताओं को जानकारी दी, जिनमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी, यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और नाटो महासचिव मार्क रूट शामिल थे। यूरोपीय नेताओं ने सावधानी के साथ इस पहल का समर्थन किया और शांति के बाद की स्थिति पर चर्चा की।
अमेरिकी स्थायी प्रतिनिधि डोरोथी शी ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका युद्ध खत्म करने के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है, लेकिन रूस की मंशा पर संदेह बना हुआ है। उन्होंने बताया कि शिखर सम्मेलन के बाद रूस ने यूक्रेन पर दूसरा सबसे बड़ा हवाई हमला किया, जिससे उसकी शांति की इच्छा पर सवाल उठते हैं।
वहीं, यूक्रेन की उप विदेश मंत्री मारियाना बेत्सा ने स्पष्ट कर दिया कि उनका देश क्रीमिया समेत किसी भी कब्जे वाले क्षेत्र को नहीं छोड़ेगा। उन्होंने कहा कि “ये क्षेत्र यूक्रेन के संविधान और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत संप्रभु हैं। वास्तविक शांति तभी संभव है जब इसे विश्वसनीय सुरक्षा गारंटी से जोड़ा जाए।” रूस के स्थायी प्रतिनिधि वसीली नेबेंज्या ने इसके विपरीत दावा किया कि कब्जे वाले क्षेत्र ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से रूस के हिस्से रहे हैं और उन्हें कब्जा कहना राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
हरीश ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का दृष्टिकोण हमेशा जन-केंद्रित रहा है। भारत न केवल यूक्रेन को मानवीय मदद दे रहा है बल्कि आर्थिक संकट से जूझ रहे वैश्विक दक्षिण के मित्र देशों की भी सहायता कर रहा है। उन्होंने जोर दिया कि, “यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए बातचीत और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है, चाहे यह रास्ता कितना भी कठिन क्यों न लगे।”
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