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US की धमकी के बावजूद रूस से तेल खरीदेगा भारत, करेंसी होगी मजबूत

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद डॉ एमी बेरा ने रूस से भारत द्वारा कम दाम तेल खरीदे जाने की खबरों पर निराशा जताते हुए कहा कि इतिहास के इस नाजुक मोड़ पर जब दुनिया भर के लोग रूसी हमले के खिलाफ यूक्रेन के साथ खड़े हो रहे हैं, तब भारत पुतिन के पक्ष में खड़ा दिखाई देगा।

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अमेरिका की धमकी के बावजूद भारत रूस से तेल खरीदने वाला है| भारत ने तय किया है कि वह रूस से सस्ता क्रूड खरीदने की तैयारी कर रहा है| रुपये और रूबल में कच्चा तेल खरीदने के लिए डील की गई है| इस डील के तय होते ही भारतीय करेंसी को मजबूती मिलेगी| इसके अलावा, भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम काबू में रह सकते हैं|

रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने मंगलवार (15 मार्च) को कहा कि रूस से डिस्काउंट पर तेल खरीदना अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इन प्रतिबंधों का पालन करने के लिए सभी देशों से आग्रह करेगा। जेन ने कहा कि प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं होने के बावजूद जब मौजूदा समय का इतिहास लिखा जाएगा तो इसे रूसी हमले का समर्थन माना जाएगा।

भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर रूस से सैन्य आपूर्ति पर बहुत अधिक निर्भर है। वहीं, भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद डॉ एमी बेरा ने रूस से भारत द्वारा कम दाम तेल खरीदे जाने की खबरों पर निराशा जताते हुए कहा कि इतिहास के इस नाजुक मोड़ पर जब दुनिया भर के लोग रूसी हमले के खिलाफ यूक्रेन के साथ खड़े हो रहे हैं, तब भारत पुतिन के पक्ष में खड़ा दिखाई देगा।

भारत में प्रतिदिन लगभग 45 लाख बैरल तेल खपत होती है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत तेल आयात करता है और अप्रैल 2021 से जनवरी 2022 तक कुल 17.6 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात किया था। इसमें से लगभग 2 प्रतिशत खरीद ही रूस से होती रही है। यूक्रेन संकट के बाद दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हो गई है। ऐसे में रूस द्वारा दिया गया सस्ते कच्चा तेल को खरीदना भारत की एक तरह से मजबूरी है।

सूत्रों की मानें तो भारत इस डील के काफी करीब है और रूस से लगभग 35 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदेगा। इस डील में भारत को कच्चा तेल देने में शिपिंग और इंश्योरेंस की जिम्मेदारी रूस की होगी। बता दें कि रूस से कच्चा तेल खरीदने में भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों के लिए यह एक बड़ी अड़चन रही है।

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