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Tuesday, January 13, 2026
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ईरान में उथल-पुथल: मुद्रा संकट से ‘नरसंहार’ तक; मारे गए 544 प्रदर्शनकारी !

सड़कों पर जनआंदोलन और ट्रंप की चेतावनी ने बढ़ाया तनाव

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ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों ने देश को गंभीर राजनीतिक  संकट की ओर धकेल दिया है। 28 दिसंबर को ईरानी मुद्रा रियाल के तेज़ से पतन और महंगाई में भारी उछाल के विरोध से शुरू हुआ यह आंदोलन अब सीधे तौर पर इस्लामिक रिपब्लिक की धार्मिक सत्ता व्यवस्था को चुनौती देने में बदल गया है। राजधानी तेहरान समेत कई बड़े शहरों में हजारों लोग कड़े सुरक्षा इंतज़ामों और इंटरनेट बंदी के बावजूद सड़कों पर उतर आए हैं। कार्यकर्ताओं के अनुसार, यह पिछले तीन वर्षों में ईरान का सबसे बड़ा जनआंदोलन है।

प्रदर्शन अब अपने दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुके हैं। इस दौरान हिंसक कार्रवाई, अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और वाशिंगटन-तेहरान के बीच बढ़ता तनाव सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस आंदोलन को “स्वतंत्रता” का आंदोलन बताया है, जबकि मीडिया एजेंसी के हवाले से मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि अब तक कम से कम 544 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकांश प्रदर्शनकारी बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सूचना पर कड़े प्रतिबंधों के कारण मृतकों की संख्या की स्वतंत्र पुष्टि संभव नहीं हो पा रही है।

प्रदर्शन की जड़ में आर्थिक संकट है। ईरानी रियाल गिरकर 1.4 मिलियन रियाल प्रति अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने अर्थव्यवस्था को और जकड़ दिया है। लेकिन यह आर्थिक नाराज़गी देखते ही देखते राजनीतिक असंतोष में बदल गई है और नारे सीधे मौलवी शासन के खिलाफ लगने लगे है।

तेहरान, मशहद और अन्य शहरों में रात के समय लोग सड़कों पर उतरकर नारेबाज़ी कर रहे हैं, तालियां बजा रहे हैं और मोबाइल फोन की रोशनी जलाकर विरोध जता रहे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए कई अप्रमाणित वीडियो में बड़े पैमाने पर भीड़ दिखाई दे रही है। मीडिया एजेंसी के अनुसार, कुछ वीडियो संभवतः स्टारलिंक सैटेलाइट कनेक्शन के जरिए भेजे गए हैं। इनमें तेहरान के पुनक इलाके में आतिशबाज़ी, सड़कों पर अवरोध और मशहद में सुरक्षा बलों के साथ झड़पों के दृश्य दिख रहें हैं।

सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान (CHRI) के हवाले से मीडिया ने कहा कि उसे प्रत्यक्षदर्शियों और विश्वसनीय सूत्रों से  जानकारी मिली है कि इंटरनेट शटडाउन के दौरान सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है। संगठन ने कहा, “ईरान में नरसंहार हो रहा है। दुनिया को और जानें जाने से रोकने के लिए अब कार्रवाई करनी चाहिए।”

ईरानी सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अमेरिका और इज़राइल पर अशांति फैलाने का आरोप लगाया है। राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि दुश्मनों ने “आतंकवादियों” को भेजा है, जो मस्जिदों, बैंकों और सार्वजनिक संपत्तियों पर हमले कर रहे हैं।

स्थिति बिगड़ने के बीच ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने बातचीत का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा, “अमेरिकी सेना इस पर विचार कर रही है, और हम कुछ बहुत ही मजबूत विकल्पों पर गौर कर रहे हैं।” साथ ही चेतावनी दी, “अगर वे ऐसा करते हैं, तो हम उन पर ऐसे स्तर पर प्रहार करेंगे जैसा उन्होंने पहले कभी नहीं किया होगा।” ट्रंप के अनुसार, अमेरिका सैन्य कार्रवाई, साइबर ऑपरेशन, कड़े प्रतिबंध और विपक्षी समूहों को ऑनलाइन समर्थन जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वह एलन मस्क से ईरान में इंटरनेट बहाल करने को लेकर बात करेंगे।

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र क़ालीबाफ़ ने चेतावनी दी कि यदि ईरान पर हमला हुआ तो क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने लक्ष्य किए जाएंगे। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी बड़े सैन्य फैसले का अंतिम अधिकार ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली ख़ामेनेई के पास है। कुल मिलाकर, ईरान में जारी संकट केवल घरेलू असंतोष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा संतुलन को भी प्रभावित करने की क्षमता रखता है।

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