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Wednesday, October 28, 2026
होमन्यूज़ अपडेटI-PAC छापा: तृणमूल समर्थकों की अदालत की कार्यवाही “हाईजैक” करने की कोशिश

I-PAC छापा: तृणमूल समर्थकों की अदालत की कार्यवाही “हाईजैक” करने की कोशिश

मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

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कोलकाता में राजनीतिक रणनीति सलाहकार फर्म I-PAC (Indian Political Action Committee) से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी को लेकर विवाद और गहराता जा रहा है। ED ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए आरोप लगाया है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के समर्थकों ने न्यायिक कार्यवाही को बाधित करने और उसे “हाईजैक” करने की कोशिश की। कलकत्ता हाईकोर्ट में मामलें की सुनवाई के दौरान को अदालत कक्ष में अव्यवस्था और अत्यधिक भीड़ के कारण न्यायाधीश को परिसर छोड़ना पड़ा और सुनवाई 17 जनवरी को टालनी पड़ी, जिसके बाद ED ने शीर्ष अदालत का रुख किया है।

ED ने अपनी याचिका में कहा है कि पिछले सप्ताह कोलकाता में I-PAC से जुड़े परिसरों पर की गई तलाशी के दौरान और उसके बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। एजेंसी के अनुसार, समर्थकों की मौजूदगी और कथित दबाव के चलते न सिर्फ जांच प्रभावित हुई, बल्कि अदालत की कार्यवाही भी बाधित हुई है। ED का दावा है कि सुनवाई के दिन अदालत में ऐसा माहौल बनाया गया कि न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना संभव नहीं रहा।

इससे पहले 9 जनवरी को भी ED सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। उस याचिका में एजेंसी ने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उसके I-PAC से जुड़े कोयला घोटाले की जांच में बाधा डाल रहीं हैं। ED ने मांग की थी कि पूरे घटनाक्रम की CBI जांच कराई जाए, यह कहते हुए कि उसका “निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच का अधिकार राज्य मशीनरी द्वारा सीमित किया गया है।”

अपनी ताजा याचिका में ED ने घटनाओं का क्रमवार विवरण देते हुए तलाशी के दौरान एक तरह के “शोडाउन” का जिक्र किया है। एजेंसी का आरोप है कि उसके अधिकारियों को कानूनी रूप से तलाशी लेने और कोयला तस्करी से जुड़े सबूत जब्त करने से रोका गया। ED के मुताबिक, वरिष्ठ राज्य अधिकारियों की मौजूदगी में भौतिक दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जबरन परिसर से हटाया गया, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

ED ने यह भी कहा है कि राज्य पुलिस सहित सरकारी तंत्र के हस्तक्षेप से न्याय में बाधा उत्पन्न हुई और जांच की विश्वसनीयता प्रभावित हुई। इसी सिलसिले में तलाशी का हिस्सा रहे तीन ED अधिकारियों ने अलग से याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उनके कर्तव्यों में राज्य सरकार द्वारा “अवरोध” डाला गया।

उधर, पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दिया है। कैविएट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ED को कोई भी अंतरिम राहत देने से पहले राज्य सरकार का पक्ष सुना जाए। सरकार का कहना है कि बिना उसका पक्ष सुने कोई आदेश पारित न किया जाए।

यह विवाद कोलकाता में I-PAC से जुड़े ठिकानों पर हुई ED की छापेमारी से जुड़ा है, जिसे एजेंसी मल्टी-करोड़ कोयला घोटाले की जांच का हिस्सा बता रही है। ED का दावा है कि करीब 10 करोड़ रुपये की कथित अपराध-आय हवाला चैनलों के जरिए I-PAC तक पहुंचाई गई और 2022 गोवा विधानसभा चुनाव के दौरान तृणमूल कांग्रेस की सेवाओं के भुगतान के रूप में इसका इस्तेमाल हुआ। मामला अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष है, जहां ED और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच इस टकराव पर आगे की सुनवाई में अहम दिशा तय होने की उम्मीद है।

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