पश्चिम एशिया में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध को एक महीना पूरा हो चुका है, लेकिन संघर्ष थमने के कोई संकेत नहीं हैं। जहां एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में हिंसा और हमले लगातार जारी हैं। इस एक महीने में युद्ध ने भारी मानवीय, सैन्य और आर्थिक नुकसान पहुंचाया है।
पिछले एक महीनें में कितनी हुई मौतें?
अब तक इस युद्ध में 4,500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। मानवाधिकार संगठन HRANA के अनुसार, केवल ईरान में ही लगभग 3,300 लोगों की जान गई है, जिनमें 1,464 आम नागरिक और कम से कम 217 बच्चे शामिल हैं। 28 फरवरी को युद्ध के पहले दिन दक्षिणी ईरान के एक स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में 175 लोगों की मौत हुई, जिनमें अधिकांश स्कूली छात्राएं थीं। यह हमला अमेरिका की ओर से किया गया था।
इज़राइल में ईरानी हमलों के कारण कम से कम 19 लोगों की मौत हुई है और 5,492 से अधिक लोग घायल हुए हैं। वहीं, अमेरिकी सेना ने भी पश्चिम एशिया में ईरानी हमलों के चलते 13 सैनिकों के हताहत होने की पुष्टि की है।
दौरान ईरान युद्ध के कारण लेबनान में इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच भी संघर्ष तेज़ हो गया है। 2 मार्च के बाद से इज़राइली हमलों में लेबनान में 1,100 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 121 बच्चे शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, केवल तीन हफ्तों में लेबनान में 3.7 लाख से अधिक बच्चों को अपने घर छोड़ने पड़े, जबकि कुल मिलाकर 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं।
हजारों ठिकाने तबाह, गोला-बारूद की कमी
एक महीने में हजारों सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान में 1,000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए, जबकि इज़राइल ने 750 ठिकानों को निशाना बनाया। शुरुआती दो हफ्तों में कुल 15,000 ठिकानों पर हमले किए जाने का दावा किया गया।
अमेरिका ने इस दौरान 850 से अधिक टॉमहॉक मिसाइल दागीं, जबकि 900 से ज्यादा स्टील्थ क्रूज़ मिसाइल और 1,000 से अधिक गाइडेड बमों का इस्तेमाल किया गया। कई महंगे MQ-9 रीपर ड्रोन भी नष्ट हो चुके हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका जल्द ही कुछ महत्वपूर्ण मिसाइलों के भंडार की कमी का सामना कर सकता है। इज़राइल के भी ब्लू स्पैरो और डेविड्स स्लिंग इंटरसेप्टर, युद्ध के कारण अप्रैल की शुरुआत तक खत्म होने की कगार पर हैं।
हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि ईरान ने अभी अपनी पूरी सैन्य क्षमता का इस्तेमाल नहीं किया है। अनुमान है कि ईरान के पास हजारों ड्रोन और मिसाइलों का भंडार अब भी मौजूद है और वह बड़े पैमाने पर उत्पादन करने में सक्षम है।
आर्थिक लागत: अमेरिका पर भारी बोझ
इस युद्ध की लागत भी बेहद भारी है। अनुमान के मुताबिक, अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध में प्रतिदिन करीब 1 अरब डॉलर (लगभग 9,486 करोड़ रुपये) खर्च कर रहा है। युद्ध के पहले छह दिनों में ही अमेरिका को 11.3 अरब डॉलर का खर्च उठाना पड़ा था।
व्हाइट हाउस ने इस युद्ध के लिए अतिरिक्त 200 अरब डॉलर की मांग की है, ताकि हथियारों और अन्य संसाधनों की कमी को पूरा किया जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में यह लागत और बढ़ सकती है।
इसी बीच युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिख रहा है। ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद किए जाने के बाद तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। 27 फरवरी को 72 डॉलर प्रति बैरल रहने वाला कच्चा तेल अब 90 से 100 डॉलर के बीच पहुंच गया है, जबकि 9 मार्च को यह 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस संकट के कारण वैश्विक आर्थिक वृद्धि 2 प्रतिशत से नीचे जा सकती है, जबकि महंगाई 4 प्रतिशत से ऊपर बनी रह सकती है। गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, तेल की कीमतों में उछाल के कारण अमेरिका के होटल, रेस्टोरेंट और रिटेल सेक्टर में हर महीने करीब 10,000 नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।
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