7 साल बाद भारत पहुंचा ईरानी कच्चा तेल; भारतीय जहाजों पर ‘कोई टोल नहीं’

ईरान के राजदूत ने दी जानकारी

Iranian crude oil reaches India after 7 years; 'no toll' on Indian ships

करीब सात वर्षों के अंतराल के बाद भारत में ईरानी कच्चे तेल की आपूर्ति फिर शुरू हो चुकी है। हाल ही में दो बड़े टैंकर भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचे हैं, जो 2019 के बाद पहली बार इस तरह की डिलीवरी मानी जा रही है। इस बीच, भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले भारतीय जहाजों से कोई ‘टोल’ नहीं लिया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईरान-ध्वज वाला टैंकर ‘फ़ेलिसिटी’ गुजरात के सिक्का बंदरगाह पर पहुंचा है, जिसमें लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल था। यह खेप मार्च के मध्य में खार्ग द्वीप से लोड की गई थी। वहीं, कुराकाओ-ध्वज वाला एक अन्य टैंकर ‘जया’ ओडिशा के पारादीप बंदरगाह के पास पहुंचा, जिसमें इसी तरह की मात्रा में कच्चा तेल लाया गया।

इन खेपों के खरीदारों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, हालांकि पारादीप पोर्ट का संचालन करने वाली इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने कम से कम एक खेप खरीदने की बात स्वीकार की है। सिक्का बंदरगाह रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के लिए भी एक महत्वपूर्ण क्रूड हैंडलिंग हब है।

इससे पहले 2 अप्रैल को मंगलुरु बंदरगाह पर 44,000 टन ईरानी एलपीजी की खेप भी पहुंची थी, जो भारत-ईरान ऊर्जा व्यापार के फिर से सक्रिय होने के संकेत देती है। उल्लेखनीय है कि 2019 में अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों के बाद दोनों देशों के बीच तेल व्यापार लगभग ठप हो गया था। भारत, जो दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है, पहले ईरान का प्रमुख ग्राहक रहा है।

हालांकि, मौजूदा स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। हाल ही में अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर नाकेबंदी की घोषणा की है, जिससे उसके तेल निर्यात को सीमित करने की कोशिश की जा रही है। इससे पहले ‘पिंग शुन’ नामक एक टैंकर, जो गुजरात के वाडीनार बंदरगाह की ओर आ रहा था, भुगतान संबंधी समस्याओं के चलते चीन की ओर मुड़ गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्तमान में लगभग 95 मिलियन बैरल ईरानी तेल समुद्र में जहाजों पर स्टोर है, जिसमें से करीब 51 मिलियन बैरल भारत के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।

नई दिल्ली में बोलते हुए राजदूत मोहम्मद फतहाली ने कहा, “आप भारतीय सरकार से पूछ सकते हैं कि क्या हमने अब तक कोई शुल्क लिया है। इस कठिन समय में हमारे संबंध अच्छे हैं। हम मानते हैं कि ईरान और भारत के साझा हित और साझा भविष्य हैं।” उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि ईरान रणनीतिक जलमार्ग से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने में भारत का सहयोग करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आपूर्ति जारी रहती है, तो भारत-ईरान ऊर्जा संबंधों में एक बार फिर तेजी आ सकती है, हालांकि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेंगी।

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