पश्चिम अफ्रीकी देश माली एक बार फिर भीषण जिहादी हिंसा से दहल उठा है। मध्य माली के कई गांवों में हुए ताजा आतंकी हमलों में दर्जनों लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। स्थानीय अधिकारियों और सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में हुई हिंसा में मरने वालों की संख्या 70 से अधिक हो चुकी है, जबकि कुछ अधिकारियों का दावा है कि मृतकों की संख्या 80 तक पहुंच गई है।
इन हमलों की जिम्मेदारी अल-कायदा से जुड़े आतंकी संगठन “ग्रुप फॉर द सपोर्ट ऑफ इस्लाम एंड मुस्लिम्स” (JNIM) ने ली है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आतंकियों ने खास तौर पर उन गांवों को निशाना बनाया, जिन्होंने जिहादी समूहों के साथ समझौता करने या उनके नियम मानने से इनकार कर दिया था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार (6 मई)को शुरू हुए हमलों में कम से कम 30 लोगों की मौत हुई थी, लेकिन शुक्रवार (8 मई)तक हिंसा और ज्यादा बढ़ गई। कई गांवों में हथियारबंद आतंकियों ने घुसकर अंधाधुंध हत्या की, जिससे पूरे इलाके में भय और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
हमलों के बाद स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा और निराशा देखी जा रही है। एक स्थानीय युवा नेता ने दर्द जाहिर करते हुए कहा, “हम खून के आंसू रो रहे हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि गांवों के पास सेना की टुकड़ियां मौजूद थीं, लेकिन कई बार मदद की अपील करने के बावजूद सैनिकों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि हमलावर घंटों तक गांवों में सक्रिय रहे और लोगों को चुन-चुनकर निशाना बनाते रहे। कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित इलाकों की ओर भागना पड़ा। हमलों के बाद क्षेत्र में मानवीय संकट और गहरा गया है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि JNIM अब उन इलाकों पर दबाव बढ़ा रहा है जहां के स्थानीय समुदाय उसके कट्टरपंथी नियमों और आदेशों को स्वीकार नहीं कर रहे। विशेषज्ञों के अनुसार, संगठन ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए डर और हिंसा का इस्तेमाल कर रहा है।
माली में पहले से ही सुरक्षा स्थिति बेहद खराब बनी हुई है। देश लंबे समय से इस्लामी आतंकवादी संगठनों, जातीय संघर्षों और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। उत्तरी और मध्य माली के बड़े हिस्सों में सरकारी नियंत्रण कमजोर पड़ चुका है और कई क्षेत्रों में आतंकी समूहों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
यह ताजा हमला पिछले महीने सैन्य शासन के खिलाफ हुए बड़े हमले के बाद हुआ है। उस हमले में JNIM और तुआरेग विद्रोही संगठन “अज़ावाद लिबरेशन फ्रंट” (FLA) ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की थी। उस घटना ने माली की सैन्य सरकार की सुरक्षा तैयारियों और आतंकवाद विरोधी रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
विश्लेषकों का कहना है कि माली में जिहादी संगठनों का बढ़ता प्रभाव पूरे साहेल क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। बुर्किना फासो, नाइजर और आसपास के कई अफ्रीकी देश पहले ही चरमपंथी हिंसा से प्रभावित हैं। ऐसे में माली में लगातार बढ़ते हमले क्षेत्रीय अस्थिरता को और गहरा सकते हैं। फिलहाल सुरक्षा बल प्रभावित इलाकों में अभियान चला रहे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में फैले डर और असुरक्षा के कारण स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है।
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