पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक हार के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) में अंदरूनी कलह और अनुशासनात्मक कार्रवाई का दौर तेज हो चूका है। पार्टी ने शनिवार (09 मई)को अपने वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ. रिजू दत्ता को तत्काल प्रभाव से छह वर्षों के लिए निलंबित कर दिया। दत्ता ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि उन्हें पार्टी की ओर से भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ आक्रामक बयान देने के लिए “दबाव” डाला जाता था, जिसे लेकर यह कार्रवाई की गई है।
तृणमूल कांग्रेस की अनुशासन समिति द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में कहा गया कि रिजू दत्ता ने पार्टी अनुशासन का गंभीर उल्लंघन किया और संगठन की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने वाले बयान दिए। आदेश पर वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य के हस्ताक्षर हैं।
हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 294 में से 207 सीटें जीतकर पश्चिम बंगाल में पूर्ण बहुमत हासिल किया, जबकि तृणमूल कांग्रेस केवल 80 सीटों पर सिमट गई। इसके साथ ही 2011 से चला आ रहा टीएमसी का 15 साल पुराना शासन समाप्त हो गया।
पार्टी के अनुसार, 8 मई 2026 को रिजू दत्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में उनसे पार्टी नेतृत्व के खिलाफ दिए गए बयानों पर जवाब मांगा गया था। टीएमसी का आरोप है कि दत्ता ने तय समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया और न ही कोलकाता स्थित तृणमूल भवन में अनुशासन समिति के सामने पेश हुए।
निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया कि अगले छह वर्षों तक रिजू दत्ता किसी भी पार्टी पद पर नहीं रहेंगे और न ही किसी रूप में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर सकेंगे। पार्टी ने आगे अतिरिक्त कार्रवाई का अधिकार भी सुरक्षित रखा है।
हालांकि, रिजू दत्ता ने पार्टी के इन दावों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि उन्होंने कारण बताओ नोटिस का जवाब समय पर जमा कर दिया था। इसके साथ उन्होंने अपने लिखित जवाब की तस्वीर भी साझा की।
अपने पोस्ट में दत्ता ने लिखा कि उन्होंने अपनी जिंदगी के 13 साल तृणमूल कांग्रेस को दिए और बिना किसी राजनीतिक परिवार या “नेपोटिज्म” के केवल अपने काम के दम पर पहचान बनाई। उन्होंने कहा कि “क्योंकि मैंने सच बोला” इसलिए निलंबित किया गया।
दत्ता ने यह भी दावा किया कि उन्होंने 9 मई 2026 को सुबह 11:27 बजे तृणमूल भवन में अपना विस्तृत जवाब जमा किया था। उन्होंने संकेत दिया कि संभवतः उनका जवाब पढ़ने से पहले ही निलंबन आदेश तैयार कर लिया गया था। पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा, “ मैं वादा करता हूँ, मैं वापस आऊंगा!! जल्द ही मिलते हैं!!”
पूरा विवाद 6 मई 2026 को सामने आए एक वीडियो बयान के बाद शुरू हुआ था। चुनाव परिणाम आने के दो दिन बाद जारी वीडियो में रिजू दत्ता ने भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को धन्यवाद दिया था। उन्होंने कहा था कि चुनाव के बाद तनावपूर्ण माहौल में भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की।
वीडियो में दत्ता ने भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी से बिना शर्त माफी भी मांगी थी। सुवेंदु अधिकारी ने हालिया चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट से हराया था। दत्ता ने कहा था कि भाजपा और उसके नेताओं के खिलाफ उनके पुराने आक्रामक बयान “दबाव में” दिए गए थे और ऐसा उन्होंने अपने परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया था।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुश्किल समय में उन्हें तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से कोई समर्थन नहीं मिला। साथ ही उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं की संयम की तारीफ करते हुए कहा कि भाजपा बहुल इलाकों में भी उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
वीडियो वायरल होने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने तुरंत उससे दूरी बना ली थी और कहा था कि रिजू दत्ता के बयान उनकी व्यक्तिगत राय हैं, जिनका पार्टी की आधिकारिक लाइन से कोई संबंध नहीं है। पार्टी ने इन टिप्पणियों को संगठनात्मक अनुशासन के खिलाफ बताया था।
चुनावी हार के बाद टीएमसी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के कई नेताओं ने संगठनात्मक कमजोरियों और भाजपा के खिलाफ आक्रामक अभियान प्रभावी तौर पर न कर पाने को लेकर चिंता जताई है। रिजू दत्ता पर हुई कार्रवाई को भी इसी व्यापक राजनीतिक संकट के संदर्भ में देखा जा रहा है।
यह भी पढ़ें:
सोमनाथ में पहली बार वायुसेना का ’सूर्यकिरण एयर शो’, ट्रायल में प्रदर्शन!
ताड़ासन से वृक्षासन तक, गर्भवती महिलाओं हेतु योगासन, आयुष ने बताए फायदे!
ताड़ासन से सुधरेगी मुद्रा, स्थिरता-संतुलन बढ़ेगा, आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे!



