अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा वॉशिंगटन के नेतृत्व वाले ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने से इनकार किए जाने के बाद फ्रांसीसी वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच कई मुद्दों पर तनाव बढ़ा हुआ है।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ पहल की घोषणा ट्रंप ने सितंबर 2025 में गाजा संघर्ष के समाधान की रणनीति के तहत की थी। इसके बाद इस पहल का दायरा बढ़ाते हुए अमेरिका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई वैश्विक नेताओं को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के समाधान के प्रयासों में शामिल होने का निमंत्रण दिया। ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का सदस्य बनने का निमंत्रण दिया है। हालांकि, फ्रांस ने फिलहाल इस पहल से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है।
सोमवार (19 जनवरी) शाम पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से मैक्रों के बयान के बारे में पूछा गया, जिसमें उन्होंने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल न होने की बात कही थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा, “क्या उसने ऐसा कहा? खैर, कोई उसे चाहता ही नहीं है क्योंकि वह बहुत जल्द पद से बाहर हो जाएगा। मैं उसकी वाइन और शैंपेन पर 200% टैरिफ लगा दूंगा, और वह शामिल हो जाएगा, लेकिन उसे शामिल होने की जरूरत नहीं है।”
इसके जवाब में फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “फ्रांस की विदेश नीति को प्रभावित करने के उद्देश्य से दी जाने वाली टैरिफ धमकियां अस्वीकार्य और अप्रभावी हैं।”
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर मैक्रों का एक कथित निजी संदेश भी साझा किया। इस संदेश में फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने लिखा था कि वह “यूक्रेनियों, डेनिश और सीरियाइयों के साथ गुरुवार को पेरिस में जी7 बैठक आयोजित कर सकते हैं,” और आगे जोड़ा गया था, “आइए बेहतर चीजें बनाने की कोशिश करें।”

सोमवार को ही मैक्रों के करीबी एक सूत्र ने पुष्टि की कि “फ्रांस इस स्तर पर इस पहल में शामिल होने के निमंत्रण को अस्वीकार करने का इरादा रखता है।” सूत्र के अनुसार, “(इसका) चार्टर केवल गाजा के ढांचे तक सीमित नहीं है। यह संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों और संरचना के सम्मान को लेकर बड़े सवाल खड़े करता है।” इसी दिन फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने भी संयुक्त राष्ट्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए उसे प्रभावी बहुपक्षवाद की आधारशिला बताया।
ट्रंप की टैरिफ धमकी से कुछ घंटे पहले ही फ्रांस ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की अमेरिकी राष्ट्रपति की महत्वाकांक्षा को लेकर अमेरिका का सार्वजनिक रूप से मजाक उड़ाया था। फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक एक्स अकाउंट से एक व्यंग्यात्मक पोस्ट में अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट द्वारा दी गई दलीलों की आलोचना की गई। पोस्ट में लिखा गया, “अगर कभी आग लगे, तो दमकलकर्मी हस्तक्षेप करेंगे तो बेहतर है कि अभी घर जला दिया जाए। अगर कभी शार्क हमला कर सकती है, तो हस्तक्षेप होगा तो बेहतर है कि अभी लाइफगार्ड को ही खा लिया जाए। अगर कभी दुर्घटना हो सकती है, तो नुकसान होगा तो बेहतर है कि अभी कार टकरा दी जाए।”
‘बोर्ड ऑफ पीस’ के मसौदा चार्टर के अनुसार, अमेरिका द्वारा लगभग 60 देशों को भेजे गए प्रस्ताव में यह शर्त रखी गई है कि यदि कोई देश तीन वर्षों से अधिक समय तक सदस्यता बनाए रखना चाहता है, तो उसे 1 अरब डॉलर नकद योगदान देना होगा। इस राशि का उपयोग वैश्विक शांति स्थापना और संघर्ष समाधान गतिविधियों के लिए किया जाना प्रस्तावित है। हालांकि, कई सरकारों ने इस पहल को लेकर सतर्क रुख अपनाया है और राजनयिकों का कहना है कि यह योजना संयुक्त राष्ट्र के कार्यों को नुकसान पहुंचा सकती है।
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