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Monday, January 5, 2026
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मेक इन इंडिया प्रभाव : रेलवे बना बोगी और इंजन का वैश्विक निर्यातक!

रेल मंत्रालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारत से दुनिया भर में डिजाइन, डेवलप और डिलीवर की कल्‍पना के तहत देश के रेल उत्पादों का निर्यात बढ़ रहा है।

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रेल मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, भारत वर्तमान में 27 इंटरनेशनल सिग्नलिंग प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व कर रहा है और दुनिया भर में 40 अतिरिक्त परियोजनाओं को सहायता प्रदान कर रहा है।

बैंगलोर का डिजिटल एक्सपीरियंस सेंटर दुनिया भर में 120 से अधिक परियोजनाओं में सहयोग कर इनोवेशन को बढ़ावा दे रहा है और आईओटी, एआई ब्लॉकचेन और साइबर सुरक्षा का इस्तेमाल कर नेक्स्ट जनरेशन की सिग्नलिंग पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

रेल मंत्रालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारत से दुनिया भर में डिजाइन, डेवलप और डिलीवर की कल्‍पना के तहत देश के रेल उत्पादों का निर्यात बढ़ रहा है। इसके तहत, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा को मेट्रो कोच और यूके, सऊदी अरब, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया को बोगियां भेजी गईं।

इसके अलावा, फ्रांस, मैक्सिको, रोमानिया, स्पेन, जर्मनी और इटली को प्रोपल्शन सिस्टम की सप्लाई की गई। मोजाम्बिक, बांग्लादेश और श्रीलंका को पैसेंजर कोच तथा मोजाम्बिक, सेनेगल, श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश और गिनी गणराज्य को रेल के इंजन निर्यात किए गए।

केन्‍द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में वडोदरा, गुजरात स्थित एल्सटॉम के सावली प्लांट का दौरा किया। यह प्लांट भारत में रेलवे वाहनों के निर्माण का एक प्रमुख केन्‍द्र है। उन्होंने सावली प्लांट में एल्सटॉम के संचालन की समीक्षा की और रखरखाव प्रक्रियाओं का गहन मूल्यांकन किया।

सावली प्लांट सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहलों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ नियमित लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों के लिए स्टेट-ऑफ द आर्ट कम्यूटर और ट्रांजिट ट्रेन कार का उत्पादन कर रहा है।

इनोवेशन और मैन्युफैक्चरिंग पर विशेष ध्यान देते हुए भारत के 3,400 से अधिक इंजीनियर दुनिया भर में 21 एल्सटॉम प्लांट के साथ सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं।

भारत ने 2016 से विभिन्न अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं के लिए 1,002 रेल कार का सफलतापूर्वक निर्यात किया है, जिससे मॉडर्न रेल सिस्टम के एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में देश की स्थिति मजबूत हुई है। सावली में 450 रेल कारों का निर्माण किया गया और क्वींसलैंड मेट्रो परियोजना के लिए ऑस्ट्रेलिया को निर्यात किया गया।

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