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Saturday, November 7, 2026
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चांदीपुरा वायरस जांच तेज, केंद्र ने राष्ट्रीय प्रतिक्रिया दल तैनात किया!

इन समन्वित प्रयासों का उद्देश्य वायरस के बारे में जानकारी आगे बढ़ाना है, जिसमें इसके संचरण की गतिशीलता, नैदानिक ​​​​स्पेक्ट्रम, महामारी विज्ञान और संभावित उपचार के तरीके शामिल हैं|  

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने चांदीपुरा वायरस (सीएचपीवी) के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए गुजरात और राजस्थान में राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल (एनजेओआरटी) तैनात कर दिया है। यह दल राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और पशुपालन एवं डेयरी विभाग (डीएएचडी) के विशेषज्ञों से मिलकर बना है। इसका उद्देश्य प्रकोप की जांच, संक्रमित क्षेत्रों की निगरानी, नैदानिक प्रबंधन, प्रयोगशाला परीक्षण, वेक्टर सर्विलांस और जनस्वास्थ्य उपायों को मजबूत करना है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देशभर में एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के तहत चांदीपुरा वायरस की लगातार निगरानी की जा रही है। विशेषज्ञ वायरस के संक्रमण के तरीके, महामारी विज्ञान, नैदानिक प्रभाव और संभावित उपचार की दिशा में व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं। एनसीडीसी का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकालीन संचालन केंद्र (पीएचईओसी) भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

आईसीएमआर-एनआईवी, आईसीएमआर-एनआईई, आईसीएमआर-एनआईवीसीआर, आईसीएमआर-एनआईपीसीआर और आईसीएआर-एनआईवीईडीआई सहित कई राष्ट्रीय संस्थान गुजरात सरकार के साथ मिलकर वायरस के विभिन्न पहलुओं पर शोध कर रहे हैं। प्रभावित जिलों में तीव्र बुखार और तीव्र एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के मामलों की सक्रिय निगरानी के साथ-साथ समुदाय आधारित सीरोसर्वे भी किए जा रहे हैं, ताकि संक्रमण की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके।

वैज्ञानिक यह भी जांच कर रहे हैं कि सैंडफ्लाई के अलावा क्या मच्छर, किलनी या अन्य सूक्ष्म कीट भी वायरस के प्रसार में भूमिका निभाते हैं। इसके साथ ही गाय, भैंस और बकरियों सहित घरेलू पशुओं के रक्त और दूध के नमूनों की भी जांच की जा रही है। गुजरात जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान केंद्र (जीबीआरसी) में वायरस के नमूनों की जीनोम सीक्वेंसिंग जारी है।

प्रारंभिक विश्लेषण में कुछ आनुवंशिक बदलाव मिले हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत अध्ययन के बाद ही सामने आएगा। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि मानव, पशु और वेक्टर निगरानी को एक साथ जोड़ने वाले ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण के जरिए चांदीपुरा वायरस के प्रकोप को नियंत्रित करने और भविष्य में इससे प्रभावी ढंग से निपटने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

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