त्रिनिदाद और टोबैगो संसद बजा जन-गण-मन, मोदी संसद को संबोधित करने वाले पहले प्रधानमंत्री!

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और ऊर्जा संकट जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच "पुराने वैश्विक संस्थान शांति और प्रगति लाने में विफल साबित हो रहे हैं"।

त्रिनिदाद और टोबैगो संसद बजा जन-गण-मन, मोदी संसद को संबोधित करने वाले पहले प्रधानमंत्री!

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक दौरे पर शुक्रवार (4 जुलाई) को त्रिनिदाद और टोबैगो की संसद में भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ बजाया गया। यह क्षण न केवल राजनयिक दृष्टिकोण से विशेष रहा, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के लिए गर्व का अवसर भी बना। पीएम मोदी त्रिनिदाद और टोबैगो की संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं।

पीएम मोदी के संबोधन से पहले संसद में ‘जन-गण-मन’ का सजीव और सम्मानजनक प्रस्तुतीकरण किया गया। यह आयोजन दोनों देशों के मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक बना। उल्लेखनीय है कि त्रिनिदाद और टोबैगो की संसद में इस्तेमाल हो रही स्पीकर का कुर्सी भी भारत सरकार ने वर्ष 1968 में उपहारस्वरूप दी थी।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद को मानवता का दुश्मन करार दिया और कहा कि इस वैश्विक चुनौती के खिलाफ सभी देशों को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “आतंकवाद को कोई आश्रय या स्थान नहीं मिलना चाहिए।”

पीएम मोदी ने वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के साथ भारत की विकासात्मक साझेदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “हमारी साझेदारी मांग आधारित, सम्मानजनक और बिना किसी शर्त के होती है।” यह टिप्पणी चीन की विस्तारवादी और ऋण-जाल आधारित कूटनीति पर एक परोक्ष कटाक्ष के रूप में देखी जा रही है।

पीएम मोदी ने वैश्विक राजनीति में आ रहे परिवर्तनों का जिक्र करते हुए कहा कि आज दुनिया में “विभाजन, विवाद और असमानता” बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और ऊर्जा संकट जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच “पुराने वैश्विक संस्थान शांति और प्रगति लाने में विफल साबित हो रहे हैं”।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की विफलताओं की ओर इशारा करते हुए कहा, “संयुक्त राष्ट्र की 75वीं वर्षगांठ पर विकासशील देशों में जो आशा जगी थी, वह अब निराशा में बदल गई है। सुधारों की उम्मीद अब ठहर गई है।” प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिनिदाद और टोबैगो का अपना दो दिवसीय दौरा पूरा कर शुक्रवार (4 जुलाई) को अर्जेंटीना के लिए प्रस्थान किया। उनका यह दौरा वैश्विक दक्षिण देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करने की रणनीतिक योजना का हिस्सा है।

यह दौरा न केवल भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाता है, बल्कि उन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को भी रेखांकित करता है जो भारत और कैरेबियाई देशों के बीच सदियों से बने हुए हैं।

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