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स्प्लैशडाउन के साथ पृथ्वी पर लौटा नासा का आर्टेमिस-II मिशन, 50 साल बाद मानव की ऐतिहासिक चंद्र यात्रा पूरी

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NASA के आर्टेमिस-II मिशन के चारों अंतरिक्ष यात्री शुक्रवार (11 अप्रैल) को प्रशांत महासागर में सफल स्प्लैशडाउन के साथ पृथ्वी पर लौट आए। यह मिशन 50 से अधिक वर्षों बाद मानवता की पहली चंद्र यात्रा रहा, जिसने अंतरिक्ष अन्वेषण में एक नया इतिहास रचा।

मिशन के कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन ने इस ऐतिहासिक उड़ान को अंजाम दिया। उनका ओरियन कैप्सूल “इंटीग्रिटी” पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश के दौरान मैक 33 (ध्वनि की गति से 33 गुना) की रफ्तार से गुजरा।

पृथ्वी पर री-एंट्री के दौरान इंटीग्रिटी कैप्सूल अत्यधिक गर्म प्लाज्मा से घिर गया, जिससे कुछ समय के लिए संचार पूरी तरह बाधित हो गया। यह छह मिनट का ब्लैकआउट मिशन के सबसे तनावपूर्ण क्षणों में से एक था। मिशन कंट्रोल की निगाहें खासतौर पर हीट शील्ड पर टिकी थीं, जिसे हजारों डिग्री तापमान सहना था। इससे पहले 2022 के बिना चालक वाले परीक्षण में हीट शील्ड की सतह पर क्षति के निशान दिखे थे।

नासा के फ्लाइट डायरेक्टर जेफ रेडिगन ने भी इस दौरान डर महसूस होने की बात करते रहें। हालांकि, सभी सिस्टम सही तरीके से काम करते रहे और पैराशूट खुलने के बाद कैप्सूल सुरक्षित रूप से समुद्र में उतर गया।

स्प्लैशडाउन के दौरान अमेरिकी नौसेना का जहाज USS जॉन पी. मुर्था सैन डिएगो तट के पास तैनात था, साथ ही हेलीकॉप्टर और सैन्य विमान भी मौजूद थे। इससे पहले 1972 में Apollo 17 के दौरान ही ऐसा संयुक्त ऑपरेशन हुआ था।

1 अप्रैल को फ्लोरिडा से लॉन्च हुए इस मिशन ने करीब 10 दिनों में कई उपलब्धियां हासिल कीं। आर्टेमिस-II ने Apollo 13 का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 4,06,771 किलोमीटर (2,52,756 मील) की दूरी तय की, जो अब तक किसी भी इंसान द्वारा पृथ्वी से सबसे दूर की यात्रा है।

मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा के उस हिस्से की तस्वीरें लीं, जिसे पहले किसी इंसान ने नहीं देखा था। इसके अलावा उन्होंने एक पूर्ण सूर्य ग्रहण का भी दुर्लभ दृश्य देखा, जिसे पायलट विक्टर ग्लोवर ने हैरान कर देने वाला बताया।

एक भावुक क्षण में अंतरिक्ष यात्रियों ने दो क्रेटर्स का नाम अपने अंतरिक्ष यान और कमांडर विसेमन की दिवंगत पत्नी कैरोल के नाम पर रखने की अनुमति भी मांगी। उन्होंने पृथ्वी और चंद्रमा की अद्भुत तस्वीरें भी साझा कीं, जिनमें अर्थसेट का दृश्य भी शामिल था, जो 1968 के Apollo 8 के प्रसिद्ध अर्थराइज की याद दिलाता है।

हालांकि मिशन के दौरान कुछ तकनीकी समस्याएं भी सामने आईं। कैप्सूल के पेयजल और प्रोपेलेंट सिस्टम में वाल्व संबंधी दिक्कतें आईं, जबकि टॉयलेट सिस्टम भी कई बार खराब हुआ। इसके बावजूद अंतरिक्ष यात्रियों ने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। क्रिस्टिना कोच ने कहा, “जब तक हम कुछ त्याग नहीं कर रहे हैं, जब तक हम कुछ जोखिम नहीं उठा रहे हैं, और ये सभी चीजें इसके लायक हैं।” वहीं जेरेमी हैनसेन ने कहा, “आप ज़मीन पर बहुत सारी टेस्टिंग करते हैं, लेकिन आपका आखिरी टेस्ट तब होता है जब आप इस हार्डवेयर को स्पेस में ले जाते हैं और यह बहुत बढ़िया होता है।”

आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत अगला मिशन Artemis III होगा, जिसमें अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर उतरने की तैयारी करेंगे, जबकि Artemis IV (2028) के तहत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास लैंडिंग का लक्ष्य रखा गया है।

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