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दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से पद्म विभूषण तक, आशा ताई को मिले ये अवॉर्ड्स

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सुरों की रानी आशा भोसले हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन उनकी मधुर आवाज और शानदार उपलब्धियां हमेशा याद की जाएंगी। मात्र नौ साल की उम्र से गाना शुरू करने वाली आशा भोसले ने सात दशकों से भी ज्यादा लंबे करियर में हजारों गाने गाए और हर तरह की संगीत शैली पर अपनी छाप छोड़ी।

शुरू में उन्हें मुख्य रूप से कैबरे और डांस नंबर्स गाने को मिलते थे, लेकिन बाद में उन्होंने ‘उमराव जान’ जैसी फिल्मों में गजलें गाकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा साबित कर दी। आशा भोसले को भारतीय सिनेमा और संगीत जगत के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए। इनमें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म विभूषण और कई फिल्मफेयर व नेशनल अवॉर्ड शामिल हैं। उनकी उपलब्धियां न सिर्फ उनकी प्रतिभा की गवाही देती हैं, बल्कि उनकी मेहनत और समर्पण को भी दर्शाती हैं।

आशा भोसले ने न सिर्फ बॉलीवुड, बल्कि जैज और शास्त्रीय संगीत में भी अपनी मास्टर क्लास दी। लता मंगेशकर के बाद हिंदी फिल्म संगीत की सबसे बड़ी आवाज मानी जाने वाली आशा भोसले ने कई पीढ़ियों को मोहित किया।

आशा ताई को कई फिल्मफेयर अवॉर्ड्स मिले, उन्हें सर्वश्रेष्ठ महिला प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर पुरस्कार 7 बार मिला। ये अवॉर्ड उन्होंने कई गानों के लिए प्राप्त किए, जिनकी लिस्ट यहां है।

1968: ‘गरीबों की सुनो’ (फिल्म – दस लाख)

1969: ‘पर्दे में रहने दो’ (शिकार)

1972: ‘पिया तू अब तो आजा’ (कारवां)

1973: ‘दम मारो दम’ (हरे रामा हरे कृष्णा)

1974: ‘होने लगी है रात’ (नैना)

1975: ‘चैन से हमको कभी’ (प्राण जाए पर वचन न जाए)

1979: ‘ये मेरा दिल’ (डॉन)

इसके अलावा उन्हें 1996 में फिल्म ‘रंगीला’ के लिए फिल्मफेयर स्पेशल अवॉर्ड और 2001 में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी मिला। आशा भोसले को दो बार सर्वश्रेष्ठ महिला प्लेबैक सिंगर का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। पहला साल 1981 की फिल्म ‘उमराव जान’ के ‘दिल चीज क्या है’ के लिए और दूसरा साल 1986 की फिल्म इजाजत के ‘मेरा कुछ सामान’ के लिए।

अन्य प्रमुख सम्मान पर नजर डालें तो आशा भोसले को भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए सर्वोच्च सम्मान साल 2000 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार मिला। वहीं, देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान साल 2008 में पद्म विभूषण से नवाजा गया। नाइटिंगेल ऑफ एशिया अवॉर्ड साल 1987 में मिला। सिंगर ऑफ द मिलेनियम साल 2000 में मिला। वहीं, आईफा अवॉर्ड साल 2002 में फिल्म ‘लगान’ के गाने ‘राधा कैसे न जले’ के लिए मिला था।

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