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नाइजीरिया को चीनी निर्मीत JF-17 ‘थंडर’ लड़ाकू विमानों के इस्तेमाल से बड़ा झटका

तकनीकी और लॉजिस्टिक समस्याओं से जूझ रहा बेड़ा

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चीन और पाकिस्तान निर्मीत JF-17 Thunder लड़ाकू विमानों को पश्चिम अफ्रीका में हवाई ताकत बढ़ाने के उद्देश्य से ख़रीदा गया था, अब इन विमानों के संचालन में नई चुनौतियां सामने आई हैं। नाइजीरिया की वायुसेना द्वारा संचालित JF-17 ब्लॉक-II विमान तकनीकी खामियों और लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं।

नाइजीरिया ने इन बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों को 2021 में अपने बेड़े में शामिल किया था। उस समय इसे देश की हवाई शक्ति में बड़ा उछाल माना गया था, खासकर देश में सक्रिय गैर-राज्य सशस्त्र समूहों के खिलाफ काउंटर-इंसर्जेंसी अभियानों को मजबूत करने के लिए इसे कारगर माना गया। हालांकि हालिया परिचालन आंकड़ों और रक्षा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार इन विमानों के संचालन में कई गंभीर तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं, जिससे इनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।

एयरफ्रेम में दरारें और संरचनात्मक थकान

रिपोर्टों के अनुसार विमान के ढांचे में अपेक्षा से कम फ्लाइट समय के भीतर ही थकान दिखाई देती हैं। कुछ मामलों में एयरफ्रेम में दरारें भी दिखने लगी हैं। ऐसी संरचनात्मक समस्याओं के कारण विमानों की नियमित और गहन जांच करनी पड़ती है, जिससे सक्रिय अभियानों के लिए उपलब्ध विमानों की संख्या कम हो जाती है। यह समस्या पहले भी इन विमानों के अन्य अंतरराष्ट्रीय उपयोगकर्ताओं द्वारा उठाई गई चिंताओं से मिलती-जुलती है।

JF-17 के उन्नत एवियोनिक्स सिस्टम को इसकी प्रमुख ताकत माना जाता है, लेकिन यही प्रणाली अब चुनौती बनती दिख रही है। मिशन कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर गड़बड़ियों के कारण कभी-कभी सिस्टम फ्रीज हो जाता है या सेंसर से गलत डेटा मिलने की समस्या सामने आती है, खासकर उड़ान के महत्वपूर्ण चरणों के दौरान। इन डिजिटल समस्याओं को ठीक करने के लिए उच्च स्तर के तकनीकी विशेषज्ञों की जरूरत पड़ती है, जो अक्सर स्थानीय रखरखाव क्षमताओं से अधिक होती है।

डेटा लिंक सिस्टम की सीमाएं

इसके अलावा विमान में लगे Link-17 टैक्टिकल डेटा लिंक सिस्टम के प्रदर्शन को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। यह प्रणाली नेटवर्क-केंद्रित युद्ध के लिए तैयार की गई है, लेकिन अब सामने आ रहा है की इसकी डेटा ट्रांसफर गति धीमी है, जिससे अन्य विमानों और जमीनी बलों के साथ तेज और स्थिर संचार बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। आधुनिक युद्धक्षेत्र में जहां रीयल-टाइम जानकारी साझा करना बेहद जरूरी होता है, वहां यह धीमापन संचालन क्षमता को प्रभावित कर रहा है।

रखरखाव और आपूर्ति श्रृंखला की चुनौती:

JF-17 लड़ाकू विमानों की इन तकनीकी समस्याओं के साथ-साथ मेंटेनेंस और आपूर्ति श्रृंखला भी नाइजीरियाई वायुसेना के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। विदेशी निर्माताओं पर निर्भर जटिल सप्लाई चेन के कारण किसी छोटे पुर्जे की खराबी भी विमान को लंबे समय तक ग्राउंडेड कर सकती है।

हालांकि JF-17 फिलहाल नाइजेरिया की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में अग्रिम पंक्ति में उपयोग हो रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे बेड़े को लगातार उड़ान योग्य बनाए रखना महंगा और तकनीकी रूप से कठिन साबित हो रहा है।

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