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पाकिस्तान में बाढ़ का कहर: पंजाब में 42 लाख लोग प्रभावित, नेता राहत को भी बना रहे सियासत का मुद्दा!

राहत वितरण की प्रक्रिया पर राजनीति शुरू हो गई है।

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पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मानसून की बाढ़ ने भीषण तबाही मचाई है। संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (UNOCHA) द्वारा जारी ताज़ा आकलन के मुताबिक, 42 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें दक्षिणी ज़िले सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं। 8 से 18 सितंबर के बीच किए गए सर्वेक्षण में 18 बाढ़ग्रस्त ज़िलों के लगभग 2,000 गाँव शामिल थे।

रिपोर्ट में पाया गया कि अब तक 28 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। करीब 1,61,700 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं और स्वास्थ्य व शिक्षा के ढांचे को भी गंभीर नुकसान पहुँचा है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने बताया कि 26 जून से 19 सितंबर के बीच पूरे देश में लगभग 30 लाख लोगों को बचाया या निकाला गया है। इस दौरान 12,559 घर क्षतिग्रस्त हुए और 6,509 मवेशी मारे गए।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बाढ़ पीड़ित परिवारों को राहत देते हुए अनुग्रह राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये (लगभग 7,000 अमेरिकी डॉलर) करने का ऐलान किया था। लेकिन राहत वितरण की प्रक्रिया पर राजनीति शुरू हो गई है।

राहत कार्य पर सियासी खींचतान

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-ज़रदारी और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ के बीच राहत प्रयासों को लेकर तकरार बढ़ गई है। बिलावल ने  कहा कि बेनज़ीर इनकम सपोर्ट प्रोग्राम (BISP) ही राहत पहुंचाने का “एकमात्र तरीका” है और इसे न मानना बाढ़ पीड़ितों के प्रति “गैर-जिम्मेदाराना रवैया” होगा। वहीं, मरियम नवाज़ ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि BISP के माध्यम से कैसे वितरित की जाएगी, जब इस प्रणाली में मानक भुगतान सिर्फ़ 10,000 रुपये है। उनका कहना है कि यह “बहुत ही सरल समाधान” बताकर जनता को गुमराह करने जैसा है।

मीडिया की तीखी टिप्पणी

पाकिस्तान के प्रमुख अख़बार एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने संपादकीय में लिखा कि यह विवाद असल में मदद पहुंचाने के तरीके पर नहीं, बल्कि श्रेय लेने और प्रभुत्व जमाने की राजनीति पर केंद्रित है। अख़बार ने दोनों नेताओं को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा,“ऐसे समय में नेताओं को व्यक्तिगत अभिमान छोड़कर देश के लिए सबसे अच्छा करना चाहिए। राहत शिविरों में भूखे और बीमार लोगों को इससे कोई मतलब नहीं है कि मरियम अपनी इज़्ज़त बचा रही हैं या विदेशी मदद की अपील कर रही हैं। उन्हें केवल खाना, दवा और आश्रय चाहिए।”

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की राजनीति इस वक्त यदि राहत प्रयासों पर टकराव में उलझी रही, तो इसका सबसे बड़ा खामियाज़ा वही लाखों लोग भुगतेंगे जो बाढ़ से सब कुछ खोकर मदद के इंतज़ार में हैं।

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