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UAE पहुंचे पीएम मोदी, मिला गार्ड ऑफ ऑनर और F-16 फाइटर जेट एस्कॉर्ट

ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर होगी अहम बातचीत; पांच देशों के दौरे की हुई शुरुआत

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (15 मई) को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी पहुंचे, जहां से उनके पांच देशों के महत्वपूर्ण कूटनीतिक दौरे की शुरुआत हुई। पीएम मोदी 20 मई तक UAE, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध के बीच हो रही इस यात्रा को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक साझेदारियों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

अबू धाबी पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत किया गया और उन्हें सेरेमोनियल गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके अलावा UAE एयरस्पेस में प्रवेश करने के बाद संयुक्त अरब अमीरात की वायुसेना के F-16 लड़ाकू विमानों ने पीएम मोदी के विमान को एस्कॉर्ट किया। इसे भारत-UAE संबंधों की मजबूती का प्रतीकात्मक संदेश माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी की UAE यात्रा भले ही छोटी हो, लेकिन इसकी रणनीतिक अहमियत काफी बड़ी मानी जा रही है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। ऐसे समय में भारत के लिए अपने प्रमुख ऊर्जा साझेदार देशों के साथ समन्वय बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दौरे के दौरान पीएम मोदी UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। बातचीत में ऊर्जा सहयोग, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रमुख मुद्दे रहेंगे। अधिकारियों के अनुसार चर्चा का मुख्य फोकस भारत के लिए स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना होगा।

UAE भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है और भारत को एलपीजी सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देशों में से एक माना जाता है। ऐसे में ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच यह बैठक भारत के लिए विशेष महत्व रखती है।

UAE दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली जाएंगे। यह यात्रा भारत की यूरोप और नॉर्डिक देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने की व्यापक कूटनीतिक पहल का हिस्सा मानी जा रही है।

इन देशों के साथ होने वाली बैठकों में व्यापार विस्तार, ग्रीन टेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी, इनोवेशन और निवेश सहयोग पर जोर रहेगा। पीएम मोदी इंडिया-नॉर्डिक समिट में भी हिस्सा लेंगे, जहां स्थिर विकास, उभरती तकनीकों और आर्थिक साझेदारी को लेकर चर्चा होने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बहु-देशीय दौरा ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा संकट और आर्थिक अनिश्चितताओं का सामना कर रही है। भारत एक तरफ अपनी दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर यूरोपीय देशों के साथ भविष्य की तकनीकों और हरित ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी ध्यान दे रहा है।

अबू धाबी में मिले औपचारिक सम्मान और F-16 एस्कॉर्ट को भारत और UAE के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों का संकेत माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, बुनियादी ढांचा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ा है।

विश्लेषकों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत की उस रणनीति को भी दर्शाता है जिसमें वह बदलते वैश्विक हालात के बीच बहुपक्षीय साझेदारियों को मजबूत कर अपनी आर्थिक और सामरिक स्थिति को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

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