संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन में बलिदान देने वाले दो भारतीय सैनिकों को मरणोपरांत सम्मान

यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस देंगे डैग हैमरशोल्ड मेडल, मेजर अभिलाषा बराक को भी मिलेगा अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार

संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन में बलिदान देने वाले दो भारतीय सैनिकों को मरणोपरांत सम्मान

Posthumous honour for two Indian soldiers who sacrificed their lives in UN peacekeeping missions

संयुक्त राष्ट्र (UN) शुक्रवार 29 मई को अंतरराष्ट्रीय शांति सैनिक दिवस के अवसर पर भारत के दो वीर सैनिकों को मरणोपरांत सम्मानित करेगा। ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय शांति सैनिक हवलदार हरभजन सिंह और नायब सूबेदार सुजीत कुमार प्रधान को संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रतिष्ठित “डैग हैमरशोल्ड मेडल” प्रदान किया जाएगा।

यह सम्मान संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा दिया जाएगा। दोनों भारतीय सैनिकों ने संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में तैनाती के दौरान अपनी जान गंवाई थी। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है और दुनिया के सबसे बड़े सैनिक योगदानकर्ताओं में शामिल है।

हवलदार हरभजन सिंह ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में संयुक्त राष्ट्र संगठन स्थिरीकरण मिशन (MONUSCO) के तहत अपनी सेवाएं दी थीं। वहीं नायब सूबेदार सुजीत कुमार प्रधान दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन में तैनात थे। दोनों सैनिकों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शांति स्थापना और नागरिकों की सुरक्षा के लिए काम किया था।

डैग हैमरशोल्ड मेडल संयुक्त राष्ट्र का एक प्रतिष्ठित सम्मान है, जो उन शांति सैनिकों को मरणोपरांत दिया जाता है जिन्होंने मिशन के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया हो। इस सम्मान का नाम संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव डैग हैमरशोल्ड के नाम पर रखा गया है।

इस मौके पर भारत की मेजर अभिलाषा बराक को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा सम्मान मिलने जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस उन्हें वर्ष 2025 के “मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर” पुरस्कार से सम्मानित करेंगे। यह पुरस्कार उन्हें महिलाओं के सशक्तिकरण और जेंडर संवेदनशीलता के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जा रहा है।

मेजर अभिलाषा बराक ने लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) के साथ तैनाती के दौरान महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, स्थानीय समुदायों के साथ संवाद मजबूत करने और जेंडर जागरूकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके कार्यों की संयुक्त राष्ट्र स्तर पर सराहना की गई है।

एक तरफ जहां भारतीय सैनिकों के बलिदान को अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर भारतीय महिला अधिकारी की उपलब्धि भी देश की सैन्य क्षमता और नेतृत्व को नई पहचान दे रही है।

संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भारत का योगदान दशकों पुराना है। हजारों भारतीय सैनिक विभिन्न संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में शांति स्थापना, मानवीय सहायता और नागरिक सुरक्षा के लिए अपनी सेवाएं दे चुके हैं। कई भारतीय सैनिकों ने इन मिशनों में अपनी जान भी न्योछावर की है।

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