भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार (29 मई) को भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दिन की शुरुआत मजबूती के साथ होने के बावजूद कारोबार के अंतिम घंटों में तेज बिकवाली ने बाजार की दिशा पूरी तरह बदल दी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर से 1,092 अंक टूटकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 23,550 के नीचे फिसल गया। कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 1,092.05 अंक यानी 1.44 प्रतिशत गिरकर 74,775.74 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 भी 359.40 अंक यानी 1.50 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,547.75 के स्तर पर बंद हुआ।
दिन के दौरान बाजार में शुरुआती तेजी देखने को मिली थी। सेंसेक्स ने कारोबार के दौरान 76,220.02 का उच्चतम स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 24,002.80 तक पहुंच गया था। हालांकि दोपहर बाद बिकवाली का दबाव तेजी से बढ़ा और बाजार लाल निशान में चला गया।
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह मानसून को लेकर बढ़ती चिंता रही। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश के अनुमान को घटाकर दीर्घकालिक औसत के 92 प्रतिशत से 90 प्रतिशत कर दिया। इस संशोधित अनुमान ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
कम बारिश की आशंका से कृषि उत्पादन, ग्रामीण मांग और देश की आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ने का डर बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है तो खाद्य पदार्थों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है और महंगाई की समस्या फिर गहरा सकती है।
इसके अलावा देश के कई हिस्सों में जारी भीषण गर्मी और हीटवेव की स्थिति ने भी चिंता बढ़ाई है। निवेशक प्रशांत महासागर में एल नीनो जैसी मौसम परिस्थितियों के विकसित होने की संभावना पर भी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इससे मानसून और प्रभावित हो सकता है।
एक इंटरव्यू में मैनेजिंग डायरेक्टर जतिन सिंह ने कहा कि इस साल सूखे जैसी स्थिति बनने की संभावना लगभग 60 प्रतिशत तक है। हालांकि IMD ने आधिकारिक तौर पर इसे सूखा घोषित नहीं किया है, लेकिन सामान्य से कम बारिश की आशंका ने बाजार में घबराहट बढ़ा दी है।
बाजार पर विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का भी असर देखने को मिला। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बुधवार को करीब ₹1,040 करोड़ के शेयर बेचे। विदेशी फंडों की लगातार निकासी इस साल निवेशकों की धारणा पर लगातार दबाव बना रही है।
कारोबार के अंतिम घंटे में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। शाम 3 बजे के बाद लगभग सभी सेक्टरों में बिकवाली तेज हो गई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इसका एक बड़ा कारण MSCI मई 2026 इंडेक्स रीबैलेंसिंग भी रहा।
MSCI रीबैलेंसिंग के दौरान वैश्विक फंड अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करते हैं, जिसके कारण बड़ी मात्रा में खरीद और बिक्री होती है। खासकर निष्क्रिय निवेश फंड (Passive Funds) इंडेक्स में बदलाव के अनुसार अपने निवेश समायोजित करते हैं, जिससे अंतिम घंटों में बाजार में अस्थिरता बढ़ जाती है।
मानसून को लेकर चिंता, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और MSCI से जुड़ी तकनीकी समायोजन प्रक्रिया, इन तीनों कारकों के संयुक्त असर ने भारतीय शेयर बाजार को भारी दबाव में ला दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मानसून की प्रगति, वैश्विक बाजार संकेत और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
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