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Wednesday, January 14, 2026
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यह रहे पहलगाम के आतंकी पाकिस्तानी होने के सबूत !

वोटर ID, चॉकलेट रैपर, GPS और बायोमेट्रिक

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28 जुलाई को श्रीनगर के दाचीगाम इलाके में ऑपरेशन महादेव में संयुक्त सुरक्षा बलों ने मार गिराए तीनों आतंकियों के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों ने पुख्ता सबूत पेश किए हैं, जिससे यह साफ हो गया है कि ये आतंकी पाकिस्तान से आए लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य थे। इन आतंकियों ने 22 अप्रैल को पहलगाम के बैसारन घाटी में हुए नरसंहार को अंजाम देते हुए 26 निर्दोष पर्यटकों की जान ली थी। अब पाकिस्तानी वोटर ID, कराची में बनी चॉकलेट, और GPS व बायोमेट्रिक रिकॉर्ड के जरिए उनके पाकिस्तानी मूल की पुष्टि हुई है।

इन तीनो की पहचान कुछ ऐसे हुई है:

1- असली नाम – सुलेमान साह
कोड नेम – फैजल जट्ट
कैटेगरी – A+
कमांडर    मास्टरमाइंड और मुख्य शूटर

2- असली नाम – अबू हमज़ा    
कोड नेम – अफगान
कैटेगरी – A+
कमांडर और दूसरा शूटर

3- असली नाम – यासिर
कोड नेम – जिब्रान
कैटेगरी A+
कमांडर    तीसरा शूटर

मारे गए आतंकियों में से दो आतंकी सुलेमान शाह उर्फ़ ‘फैजल जट्ट’ और अबु हमज़ा उर्फ़ ‘अफ़ग़ानी’ के पास से पाकिस्तान के निर्वाचन आयोग द्वारा जारी वोटर ID कार्ड बरामद हुए हैं। वोटर सीरियल नंबर लाहौर (NA-125) और गुजरांवाला (NA-79) के वोटर लिस्ट से मेल खाते हैं।

एक डैमेज सैटेलाइट फोन से मिले माइक्रो-SD कार्ड में पाकिस्तान के NADRA (नेशनल डेटाबेस एंड रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी) का डेटा मिला है, जिसमें आतंकियों की उंगलियों के निशान, चेहरे की संरचना और परिवार का विवरण मौजूद था। उनके पते कासुर ज़िले के चंगा मांगा और पीओके के कोइयाँ गांव के हैं।

आतंकियों के बैग से कैंडीलैंड और चोकोमैक्स ब्रांड की चॉकलेट के रैपर मिले, जो पाकिस्तान के कराची में निर्मित होती हैं। साथ ही, सुलेमान शाह की घड़ी (गार्मिन GPS डिवाइस) से मिले कोऑर्डिनेट्स हमले के दौरान दर्ज फायरिंग पोजिशन से मेल खाते हैं।

पुलिस और फोरेंसिक टीम द्वारा बैसारन घाटी में बरामद 7.62×39 मिमी की गोली के खोल की बैलिस्टिक जांच की गई। यह गोलियां ऑपरेशन महादेव में बरामद AK-103 राइफलों से मेल खाती हैं, जिससे यह पुष्टि हो गई कि यही तीनों आतंकी बैसारन हमले में शामिल थे। इसके अतिरिक्त, एक फटी हुई कमीज़ पर मिले खून के डीएनए और डाचीगाम में मारे गए आतंकियों के माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए प्रोफाइल एक जैसे पाए गए।

एजेंसियों ने आतंकियों की भारत में घुसपैठ का भी ब्योरा जारी किया है। तीनों आतंकी मई 2022 में गुरेज सेक्टर के रास्ते एलओसी पार करके भारत में घुसे थे। 21 अप्रैल 2025 को वे बैसारन घाटी से 2 किलोमीटर दूर हिल पार्क के एक ‘ढोक’ (मौसमी झोपड़ी) में रुके, जहां दो स्थानीय कश्मीरी परवेज और बशीर अहमद ने उन्हें रात भर पनाह और खाना दिया। 22 अप्रैल को आतंकियों ने दोपहर 2:30 बजे हमला किया और फिर डाचीगाम के जंगलों की ओर फरार हो गए, जहां 28 जुलाई को सेना और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मारे गए।

इन पुख्ता सबूतों से स्पष्ट है कि पाकिस्तान की जमीन से आतंकवाद को न केवल शरण मिल रही है बल्कि सक्रिय समर्थन भी दिया जा रहा है। वोटर ID से लेकर NADRA डाटा तक, सब कुछ आतंकियों के राज्य-प्रायोजित नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

अब सवाल है कि भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस सीमापार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर क्या सख्त रुख अपनाते हैं। पहलगाम जैसे खूबसूरत पर्यटन स्थल पर हुए इस जघन्य नरसंहार की साजिश और उसकी पुष्टि ने आतंक के खिलाफ लड़ाई को और निर्णायक मोड़ पर पहुंचा दिया है।

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