पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने शुक्रवार (19 सितंबर) को दावा किया कि यदि भविष्य में भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष की स्थिति पैदा होती है, तो सऊदी अरब पाकिस्तान की ओर से खड़ा होगा। आसिफ ने यह बयान मीडिया से बातचीत के दौरान दिया। पाकिस्तानी मीडिया में दिए इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा,“जी बिल्कुल, इसमें कोई शक नहीं है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई आक्रामक (aggressive) सैन्य समझौता नहीं है, बल्कि नाटो की तर्ज पर एक रक्षात्मक ढांचा है।
आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी सेना को प्रशिक्षण देता रहा है और यह नया समझौता उसी साझेदारी का औपचारिक विस्तार है। उन्होंने आगे कहा,“अगर सऊदी अरब या पाकिस्तान पर किसी भी देश द्वारा आक्रामण किया जाता है, तो हम मिलकर उसका जवाब देंगे।”
यह सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौता (Strategic Mutual Defence Agreement) 17 सितंबर को रियाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सऊदी क्राउन प्रिंस के बीच साइन किया गया। संयुक्त बयान में कहा गया, “किसी भी देश द्वारा सऊदी अरब या पाकिस्तान पर आक्रामण को दोनों देशों पर आक्रामण माना जाएगा और उसका संयुक्त रूप से बचाव किया जाएगा।”
आसिफ ने यहां तक कहा कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार भी सऊदी अरब के लिए उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने समझौते को,“लगभग आठ दशकों पुरानी ऐतिहासिक साझेदारी और इस्लामी भाईचारे की मजबूती” का प्रतीक बताया। समझौते पर भारत के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को प्रतिक्रिया दी। प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा,“भारत और सऊदी अरब के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी है, जो पिछले कुछ वर्षों में काफी गहरी हुई है। हमें उम्मीद है कि यह साझेदारी आपसी हितों और संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखेगी।”
गौरतलब है कि पाकिस्तान एकमात्र इस्लामी देश है जिसके पास परमाणु हथियार हैं। इस कारण उसका सऊदी अरब को रक्षा सहयोग का आश्वासन देना रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
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