जानकारी के अनुसार, इस सूची को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित शोध संस्थान ने तैयार किया है, जिसमें वैज्ञानिकों का चयन उनके शोध कार्य, प्रकाशित शोधपत्रों, आविष्कारों और वैश्विक योगदान के आधार पर किया गया। वाराणसी से शामिल वैज्ञानिक ने अपने अभिनव कार्यों और लगातार किए जा रहे शोध के माध्यम से विज्ञान जगत को नई दिशा दी है। उनके शोध का सीधा असर न केवल वैज्ञानिक दुनिया पर पड़ा है, बल्कि आम लोगों के जीवन को भी बेहतर बनाने में योगदान हुआ है।
स्थानीय स्तर पर यह खबर आते ही वाराणसी में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के प्रोफेसरों व छात्रों ने इस उपलब्धि पर गर्व जताया। लोगों का मानना है कि यह सम्मान न केवल वाराणसी की बौद्धिक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाता है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
बता दें कि स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और एल्सिवियर ने ‘वर्ल्ड्स टॉप 2% साइंटिस्ट्स’ की एक सूची जारी की, जिसमें वाराणसी के कुल 90 वैज्ञानिकों को शामिल किया गया है। इनमें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी बीएचयू) के शोधकर्ता शामिल हैं। यह सम्मान वैज्ञानिकों के शोध कार्य, प्रकाशन और वैश्विक योगदान को ध्यान में रखते हुए दिया गया है।
रैंकिंग वैज्ञानिकों के साइटेशन, एच-इंडेक्स, सह-लेखन और समग्र सूचकांक पर आधारित होती है। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय हर वर्ष यह सूची तैयार करता है, जिसमें 22 प्रमुख वैज्ञानिक क्षेत्रों और 174 उप-क्षेत्रों के आधार पर वर्गीकरण किया जाता है। इस सूची में जगह पाना किसी भी वैज्ञानिक की अंतरराष्ट्रीय पहचान और शोध की गुणवत्ता को दर्शाता है।
आईआईटी बीएचयू से शामिल प्रमुख नामों में डॉ. जहर सरकार, डॉ. नरेश कुमार, डॉ. योगेशचंद्र शर्मा, डॉ. मनोज कुमार मंडल, डॉ. प्रांजल चंद्रा, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. रश्मि रेखा साहू, डॉ. नेहा श्रीवास्तव, डॉ. सुदीप मुखर्जी, डॉ. प्रलय मैती और डॉ. प्रदीप कुमार मिश्रा शामिल हैं।
बीएचयू से इस सूची में शामिल वैज्ञानिकों में प्रो. सलिल कुमार भट्टाचार्य, प्रो. जमुना शरण सिंह, प्रो. कृष्णेंदु भट्टाचार्य, प्रो. हरिकेश बहादुर सिंह, प्रो. गणेश पांडेय, प्रो. श्याम बहादुर राय, प्रो. नवल किशोर दुबे, प्रो. राजीव प्रताप सिंह और प्रो. यामिनी भूषण त्रिपाठी के नाम प्रमुख हैं।
विशेष बात यह है कि ‘हाइड्रोजन मैन’ के नाम से विख्यात स्व. प्रो. ओएन श्रीवास्तव को भी मरणोपरांत इस सूची में स्थान दिया गया है, जो वाराणसी और संस्थान दोनों के लिए गौरव की बात है।
आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि यह उपलब्धि संस्थान की अकादमिक शक्ति, शोध उत्कृष्टता और समर्पण को दर्शाती है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस तरह की मान्यता न केवल संस्थानों की वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ाएगी, बल्कि छात्रों और युवा शोधकर्ताओं को बड़े लक्ष्य तय करने और विज्ञान व समाज में सार्थक योगदान देने की प्रेरणा भी देगी।



