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Wednesday, September 30, 2026
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‘कुछ दर्द दिखाई नहीं देते’, जानिए मानसिक पीड़ा से जुड़े 5 बड़े मिथक और उनके तथ्य!

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि सबसे आम भ्रम है कि जो लोग आत्महत्या की बात करते हैं, वे वास्तव में ऐसा करना नहीं चाहते। हकीकत यह है| 

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मानसिक स्वास्थ्य हमारे जीवन का उतना ही जरूरी हिस्सा है, जितना शारीरिक स्वास्थ्य। फिर भी मानसिक परेशानी को लेकर समाज में आज भी कई तरह के भ्रम और झिझक मौजूद हैं। खासकर आत्महत्या जैसे संवेदनशील विषय पर खुलकर बात करने के बजाय अक्सर चुप्पी साध ली जाती है। यही चुप्पी कई बार किसी परेशान व्यक्ति को और अकेला महसूस करा सकती है। इसलिए जरूरत है कि हम आत्महत्या से जुड़े मिथकों को समझें, उन्हें तोड़ें और संवेदनशीलता के साथ लोगों का साथ दें।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि सबसे आम भ्रम है कि जो लोग आत्महत्या की बात करते हैं, वे वास्तव में ऐसा करना नहीं चाहते। हकीकत यह है कि गहरे मानसिक और भावनात्मक दर्द से गुजर रहे कई लोग सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से अपनी परेशानी या आत्महत्या से जुड़े विचार व्यक्त कर सकते हैं। ऐसे किसी भी संकेत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

दूसरा मिथक है कि किसी व्यक्ति से आत्महत्या के बारे में पूछने से उसके मन में यह विचार आ सकता है। ऐसा नहीं है। संवेदनशीलता और बिना जज किए सीधे बातचीत करना व्यक्ति को अपनी भावनाएं व्यक्त करने का मौका दे सकता है। कई बार किसी परेशान इंसान को समाधान से पहले सिर्फ एक ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है, जो उसकी बात ध्यान से सुने।

यह मानना भी सही नहीं है कि आत्महत्या करने वाला व्यक्ति मरने का पूरी तरह दृढ़ निश्चय कर चुका होता है। आत्महत्या के विचारों से जूझ रहे कई लोग गहरे भावनात्मक दर्द से राहत चाहते हैं और उनके मन में दुविधा भी हो सकती है। ऐसे समय में समय पर सहायता और उचित हस्तक्षेप महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

एक और भ्रम है कि आत्महत्या हमेशा बिना किसी चेतावनी के होती है। कई मामलों में व्यक्ति पहले से कुछ संकेत दे सकता है, जैसे लगातार निराश रहना, लोगों से दूरी बनाना, चिड़चिड़ापन, व्यवहार में अचानक बदलाव या मृत्यु के बारे में बात करना। इन संकेतों को गंभीरता से लेना जरूरी है।

यह भी जरूरी नहीं कि केवल मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोग ही आत्महत्या करते हैं। मानसिक विकार एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक हो सकते हैं, लेकिन आत्महत्या के पीछे मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, जैविक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय कई कारणों का जटिल मेल हो सकता है।

इसलिए किसी की परेशानी को छोटा न समझें। उसे सुनें, समझें और बिना किसी निर्णय के उसके साथ खड़े रहें। जरूरत महसूस होने पर विशेषज्ञ सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करें। मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए टोल-फ्री नंबर 14416 पर संपर्क किया जा सकता है।

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