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सर्वांगासन-हलासन के बाद क्यों जरूरी है मत्स्यासन, जानिए काउंटर पोज का महत्व! 

हम आपको बताएंगे कि सर्वांगासन और हलासन के तुरंत बाद मत्स्यासन काउंटर-पोज (विपरीत आसन) करना आवश्यक क्यों होता है।

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योग में हर आसन का अपना महत्व होता है, लेकिन इसका लाभ तभी मिलता है जब आसन को सही क्रम और संतुलन के साथ किया जाए। सर्वांगासन और हलासन योग के महत्वपूर्ण आसनों में गिना जाता है, लेकिन इन दोनों आसनों को करने के बाद शरीर में दबाव पड़ता है। इसी को ठीक करने के लिए मत्सासन को करना आवश्यक काउंटर-पोज यानी विपरीत आसन माना गया है।

हम आपको बताएंगे कि सर्वांगासन और हलासन के तुरंत बाद मत्स्यासन काउंटर-पोज (विपरीत आसन) करना आवश्यक क्यों होता है। आयुष मंत्रालय और मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के दिशानिर्देशों के अनुसार, सर्वांगासन और हलासन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए बाद में मत्सासन करना बेहद जरूरी और अनिवार्य माना गया है।

जब कोई भी साधक सर्वांगासन और हलासन का अभ्यास करता है, तो शारीरिक बदलाव आते हैं, जिन्हें सामान्य स्थिति में लाने के लिए मत्स्यायन एक पूरक आसन के रूप में काम करता है।

सर्वांगासन और हलासन दोनों ही ‘इनवर्जन’ (उल्टे होने वाले) आसन हैं, जिनमें छाती आगे की तरफ झुकती है और ठुड्डी पूरी तरह से छाती से चिपक जाती है। मत्स्यायन में जब सिर के ऊपरी हिस्से को जमीन पर टिकाकर रीढ़ और गर्दन को पीछे मोड़ा जाता है, तो यह जालंधर बंध के दबाव को तुरंत संतुलित कर देता है।

योग विशेषज्ञों के अनुसार, हलासन और सर्वांगासन के दौरान रीढ़ की हड्डी और गर्दन की पीछे की मांसपेशियों पर गहरा और तीव्र खिंचाव आता है। इससे गर्दन और पीठ के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियां अत्यधिक तनी हुई स्थिति में आ जाती हैं।

मत्स्यासन रीढ़ को विपरीत दिशा में (पीछे की ओर) मोड़कर एक बेहतरीन काउंटर-स्ट्रेच देता है। इससे गर्दन, कंधों और रीढ़ की हड्डी की अकड़न व तनाव दूर होता है और मांसपेशियों का संतुलन वापस सामान्य हो जाता है।

इन दोनों आसनों में गर्दन और गले पर गहरा दबाव पड़ता है, जिससे शरीर में जकड़न आ सकती है। इसी जकड़न को खोलने और शरीर में संतुलन बनाए रखने के लिए मत्स्यासन को आवश्यक काउंटर-पोज यानी विपरीत आसन माना गया है।

योग विज्ञान का नियम है कि यदि शरीर को एक दिशा में गहराई से मोड़ा गया है, तो उसे सुरक्षित रखने के लिए विपरीत दिशा में मोड़ना (काउंटर -पोज) जरूरी है। सर्वांगासन और हलासन ‘फॉरवर्ड बेंडिंग’ (गर्दन के लिए) हैं, तो मत्स्यासन उनका सटीक ‘बैकवर्ड बेंडिंग’ इलाज है जो रीढ़ व गर्दन को चोटिल होने से बचाता है।

हालांकि, इन तीनों आसनों को करने से पहले किसी विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें और गंभीर बीमारी, हालिया सर्जरी, प्रेग्नेंट महिलाएं वाले व्यक्ति आसनों को करने से बचें।

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