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राजस्थान का वो प्राचीन मंदिर, जहां विराजती हैं हर्ष और उल्लास की देवी!

इस मंदिर को देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है। कहते हैं कि जब भी कोई भक्त यहां आता है और पूरी श्रद्धा से देवी की पूजा करता है, तो उसका मन आनंद और प्रसन्नता से भर जाता है।

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राजस्थान में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जो अपनी पुरानी कहानियों और धार्मिक महत्व के लिए जाने जाते हैं।हालांकि इनमें से एक खास मंदिर है, जो हर्ष और उल्लास की देवी को समर्पित है। यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यहां की हर चीज में भक्तों के लिए एक अलग ही आकर्षण है।

हम बात कर रहे हैं दौसा जिले के आभानेरी गांव में स्थित हर्षद माता मंदिर की जो न केवल अपनी वास्तुकला और भव्यता के लिए बल्कि देवी हर्षद माता के आशीर्वाद के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है। इस मंदिर को देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है। कहते हैं कि जब भी कोई भक्त यहां आता है और पूरी श्रद्धा से देवी की पूजा करता है, तो उसका मन आनंद और प्रसन्नता से भर जाता है।

हर्षद माता का अर्थ ही है ‘हर्ष देने वाली माता’ और मान्यता है कि यह देवी हमेशा प्रसन्नचित्त रहती हैं और अपने भक्तों पर सुख, समृद्धि और हर्ष का आशीर्वाद देती हैं। मंदिर चांद बावड़ी के बिल्कुल बगल में स्थित है और यहां की वास्तुकला और मूर्तिकला देखने लायक है। मंदिर की शैलियां और डिजाइन इतनी खूबसूरत हैं कि हर आगंतुक की आंखें बस इन्हीं पर टिक जाती हैं।

इतिहास की बात करें तो यह मंदिर आठवीं-नवीं सदी में बनवाया गया था। उस समय आभानेरी का नाम आभा नगरी था और यह स्थान अपनी समृद्धि और सुंदरता के लिए जाना जाता था।

राजा चांद, जो उस समय आभानेरी के शासक थे, अपने राज्य और प्रजा के लिए बहुत ही समर्पित थे। कहा जाता है कि वे दुर्गा माता के बहुत बड़े भक्त थे और अपने राज्य में सुख और खुशहाली के लिए माता की कृपा मानते थे। इसी विश्वास के साथ उन्होंने हर्षद माता का यह मंदिर बनवाया।

हर्षद माता मंदिर सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि यह राजस्थान की स्थापत्य कला का भी अद्भुत उदाहरण है। मंदिर के अंदर और बाहर की मूर्तिकला और नक्काशी देखने लायक है।

हर साल देश-विदेश से हजारों लोग इस मंदिर को देखने आते हैं और इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता का अनुभव करते हैं। यहां आने वाले लोग देवी के आशीर्वाद के लिए मंदिर में पूजा करते हैं और अपनी खुशहाली की कामना करते हैं।
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