आनुवंशिक साक्ष्य बताते हैं कि जहाँ यूरोप के अधिकांश नवपाषाण (Neolithic) समाज कांस्य युग के दौरान शिकार-संग्रहकर्ता जीवन से खेती की ओर बढ़ गए थे, वहीं एक क्षेत्र ने इस बदलाव का लंबे समय तक विरोध किया। उस क्षेत्र के लोगों ने अपने डीएनए में एक विशिष्ट आनुवंशिक पहचान (जेनेटिक सिग्नेचर) छोड़ी। अब शोधकर्ताओं ने उसी पहचान के आधार पर निष्कर्ष निकाला है कि यही लोग लगभग 4,500 वर्ष पहले नवपाषाणकालीन ब्रिटेन की आबादी को समाप्त कर उसकी जगह बस गए थे।
पत्रिका Nature में प्रकाशित एक व्यापक अध्ययन में विश्वभर के शोधकर्ताओं की टीम ने 112 व्यक्तियों के अवशेषों से डीएनए का विश्लेषण किया, जो 8500 से 1700 ईसा पूर्व के बीच जीवित थे। यह क्षेत्र आज के बेल्जियम, नीदरलैंड और पश्चिमी जर्मनी का हिस्सा है। यह साक्ष्य शिकार-संग्रहकर्ताओं के प्रभुत्व की अप्रत्याशित कहानी बताते हैं और ब्रिटेन के उत्तर-नवपाषाण काल के पुरातात्विक रिकॉर्ड में पाए गए डीएनए के अचानक परिवर्तन का उत्तर देते हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार, प्राचीन यूरोपीय आबादियाँ लगातार प्रवास और मिश्रण करती रहीं, जिसके कारण आज के लगभग सभी यूरोपियों के जीन में तीन प्रमुख पूर्वज घटक मिलते हैं|
1-शिकार-संग्रहकर्ता
2-नवपाषाण किसान (जो निकट पूर्व से आए और यूरोप में पहली बार खेती लाए)
3-पशुपालक समुदाय, जिनकी उत्पत्ति वर्तमान रूस के क्षेत्र से मानी जाती है।
करीब 2,500 वर्षों में नए किसान समुदाय धीरे-धीरे पुराने शिकार-संग्रहकर्ताओं के साथ मिल गए, जिससे 70 से 100 प्रतिशत तक वंशीय बदलाव हुआ। लेकिन नीदरलैंड, बेल्जियम और पश्चिमी जर्मनी के आर्द्र, नदीय और तटीय क्षेत्रों में शिकार-संग्रहकर्ता वंशावली लगभग 3,000 वर्ष अधिक समय तक प्रमुख बनी रही।
शोधकर्ताओं के शब्दों में, वहाँ “अलग-थलग समुदाय” विकसित हुए, जहाँ विचारों का आदान-प्रदान तो हुआ, लेकिन जीन का प्रवाह बहुत कम रहा।
अर्थात, जब लगभग 4500 ईसा पूर्व खेती करने वाले लोग उत्तर-पश्चिमी यूरोप पहुँचे, तो वहाँ की आनुवंशिक संरचना में बड़ा बदलाव नहीं आया। स्थानीय शिकार-संग्रहकर्ता समुदायों ने खेती से जुड़ी कुछ प्रथाएं अपनाईं, लेकिन आनुवंशिक योगदान बहुत सीमित रहा।
अध्ययन से संकेत मिलता है कि किसानों का आगमन मुख्यतः महिलाओं के विवाह के माध्यम से हुआ, जो अपने साथ खेती का ज्ञान और अपने जीन लाई, लेकिन पुरुष शिकार-संग्रहकर्ताओं का आनुवंशिक प्रभुत्व बना रहा।
हालांकि, वेटलैंड के शिकार-संग्रहकर्ता पूरी तरह परिवर्तन से अछूते नहीं रहे। समय के साथ उन्होंने खेती से जुड़ी कई सांस्कृतिक परंपराएँ अपनाईं, जैसे मिट्टी के बर्तन बनाना। इससे Corded Ware culture का विकास हुआ, जिसका नाम उसकी विशिष्ट रस्सीनुमा डिजाइन वाली मिट्टी के बर्तनों पर पड़ा।
लेकिन वेटलैंड क्षेत्र पर इस संस्कृति का गहरा प्रभाव नहीं पड़ा। इसके बजाय लगभग 2500 ईसा पूर्व Bell Beaker culture का आगमन निर्णायक साबित हुआ। यह संस्कृति पश्चिमी यूरोप में प्रारंभिक कांस्य युग में उभरी और इसका नाम इसकी घंटीनुमा (बेल-आकार) मिट्टी के बर्तनों से पड़ा।
शोधकर्ताओं ने पाया कि बेल बीकर संस्कृति और स्थानीय शिकार-संग्रहकर्ताओं के मिश्रण से बना विशिष्ट आनुवंशिक समूह लगभग 2400 ईसा पूर्व ब्रिटेन पहुँचा। इसके बाद यह मिश्रित डीएनए तेजी से वहाँ प्रमुख हो गया।
परिणामस्वरूप, वेटलैंड क्षेत्र में विकसित यह अपेक्षाकृत नया आनुवंशिक मिश्रण ब्रिटेन में फैल गया और वहाँ की नवपाषाण आबादी यानी Stonehenge के मूल निर्माताओं की वंशावली को लगभग पूरी तरह बदल दिया। अध्ययन के अनुसार, बेल बीकर संस्कृति ने उत्तर-पश्चिमी यूरोप, विशेषकर ग्रेट ब्रिटेन में, 90–100 प्रतिशत तक स्थानीय नवपाषाण वंशावली का प्रतिस्थापन कर दिया।
इस प्रकार, प्राचीन डीएनए के इस शोध ने न केवल यूरोप के सांस्कृतिक परिवर्तन की नई तस्वीर प्रस्तुत की है, बल्कि ब्रिटेन के इतिहास के एक बड़े और हिंसक आनुवंशिक बदलाव की गुत्थी भी सुलझा दी है।
