स्टार्टअप्स बढ़ाने सरकार ने प्रमुख कंपनियों संग रणनीतिक समझौते किए!

इस साझेदारी का उद्देश्य डीपीआईआईटी से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक समाधान और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना है।

स्टार्टअप्स बढ़ाने सरकार ने प्रमुख कंपनियों संग रणनीतिक समझौते किए!

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केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख उद्योग संगठनों और इकोसिस्टम भागीदारों के साथ कई रणनीतिक समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिनका उद्देश्य स्टार्टअप्स को वित्तीय, तकनीकी, निवेश और क्षमता निर्माण से जुड़ी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने डिजिटल भुगतान कंपनी कैशफ्री पेमेंट्स इंडिया के साथ एक समझौता किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य डीपीआईआईटी से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक समाधान और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना है।

सरकारी बयान के अनुसार, यह सहयोग डीपीआईआईटी की संस्थागत पहुंच और कैशफ्री की डिजिटल भुगतान विशेषज्ञता को एक साथ लाकर स्टार्टअप्स को तेजी से बढ़ने में मदद करेगा, जिसके तहत पात्र स्टार्टअप्स को सुरक्षित और स्केलेबल पेमेंट एवं पेआउट समाधान, डिजिटल पहचान सत्यापन, जोखिम प्रबंधन सेवाएं, आसान ऑनबोर्डिंग और विशेष व्यावसायिक लाभ दिए जाएंगे।

इसके अलावा, डीपीआईआईटी ने डार्विन डायनेमिक्स के साथ भी एक समझौता किया है, जिसका उद्देश्य उद्यमिता विकास को बढ़ावा देना और देश में अधिक समावेशी तथा नवाचार आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करना है।

इस साझेदारी के तहत स्टार्टअप इंडिया पहल को टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही स्टार्टअप्स को मेंटरशिप, संस्थागत नेटवर्क, बाजार तक पहुंच और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का लाभ मिलेगा।

डार्विन डायनेमिक्स स्टार्टअप्स के औपचारिक पंजीकरण को बढ़ावा देने, उद्यमिता के प्रति जागरूकता फैलाने और कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत करने का काम करेगी। इसके अलावा स्वच्छ ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), जलवायु प्रौद्योगिकी और उन्नत विनिर्माण जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में नवाचार को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

डीपीआईआईटी ने वल्टर इंडिया के साथ भी साझेदारी की है, जिसका लक्ष्य स्टार्टअप्स के लिए तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। इसके तहत स्टार्टअप्स को क्लाउड कंप्यूटिंग संसाधनों, तकनीकी प्रशिक्षण और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक बेहतर पहुंच मिलेगी, जिससे वे अपने उत्पादों और सेवाओं को अधिक प्रभावी ढंग से विकसित और विस्तार कर सकेंगे।

वहीं, ऑटोमोबाइल और मोबिलिटी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए डीपीआईआईटी ने कार्स24 के साथ भी समझौता किया है। यह साझेदारी मोबिलिटी और ऑटो टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में स्टार्टअप्स को समर्थन देने पर केंद्रित होगी।

इस सहयोग के तहत एआई-आधारित नवाचार, स्टार्टअप संस्थापकों का विकास, कौशल निर्माण, निवेश अवसर और सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे उभरते स्टार्टअप्स को नई तकनीकों और उद्योग जगत के अनुभव का लाभ मिलेगा।

इसके अलावा, डीपीआईआईटी ने काउंसिल फॉर स्टार्टअप इंडिया (सीएसआई) के साथ भी एक महत्वपूर्ण समझौता किया है, जिसका उद्देश्य स्टार्टअप्स को निवेश, रणनीतिक साझेदारी, नेतृत्व विकास, मेंटरशिप और वैश्विक बाजारों तक पहुंच प्रदान करना है।

सीएसआई स्टार्टअप्स के लिए निवेश तैयारियों, कॉरपोरेट साझेदारी, सीएफओ मैचमेकिंग, अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच और वैश्विक नवाचार सहयोग से जुड़े विशेष कार्यक्रम संचालित करेगा।

साथ ही यह संगठन स्टार्टअप संस्थापकों को कॉरपोरेट गवर्नेंस, वित्तीय तैयारी, नियामकीय अनुपालन और अंतरराष्ट्रीय विस्तार से जुड़े मुद्दों पर भी सहायता प्रदान करेगा। इसके अलावा स्टार्टअप्स, निवेशकों, उद्योग जगत और नीति निर्माताओं के बीच मजबूत नेटवर्क तैयार करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इन नई साझेदारियों से भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति मिलेगी और उभरते उद्यमियों को वित्त, तकनीक, बाजार और निवेश जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आवश्यक सहयोग प्राप्त होगा, जिससे नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और भारत के वैश्विक स्टार्टअप हब बनने के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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