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Wednesday, February 11, 2026
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इंडिया-अमेरिका व्यापार समझौते की रूपरेखा में अमेरिका ने किया चुपचाप बदलाव

भारत के 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर की खरीद की 'प्रतिबद्धता'को 'इरादे' में बदला।

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की रूपरेखा जारी होने के एक दिन बाद ही व्हाइट हाउस ने उससे जुड़ी फैक्टशीट में अहम शब्दों और शर्तों में चुपचाप बदलाव कर दिए हैं। इन संशोधनों में सबसे बड़ा परिवर्तन उस भाषा को लेकर है, जिसमें पहले कहा गया था कि भारत अमेरिकी उत्पादों की खरीद को लेकर ‘प्रतिबद्ध’ है। अब इसे बदलकर भारत ‘अमेरिकी उत्पादों की खरीद का इरादा रखता है’ कर दिया गया है।

व्हाइट हाउस द्वारा मंगलवार (10 फरवरी)को जारी फैक्टशीट में पहले उल्लेख था कि भारत 500 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के अमेरिकी उत्पाद खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। शुरुआती संस्करण में लिखा गया था, “भारत ने अधिक अमेरिकी उत्पाद खरीदने और 500 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के अमेरिकी ऊर्जा, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और अन्य उत्पाद खरीदने की ‘प्रतिबद्ध’ता जताई है।”

वहीं अब संशोधित संस्करण में इसे बदलकर कहा गया है कि भारत “अधिक अमेरिकी उत्पाद खरीदने का इरादा रखता है।” इसके साथ ही उत्पाद श्रेणियों की सूची से “कृषि” शब्द को भी हटा दिया गया है।

इसी तरह, पहले फैक्टशीट में यह भी कहा गया था कि “भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और अमेरिकी खाद्य व कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क समाप्त करेगा या घटाएगा, जिनमें DDGs, रेड सोरघम, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स शामिल हैं।”

नए संस्करण में कुछ दालें (certain pulses) का उल्लेख हटा दिया गया है, जिसे भारत के घरेलू कृषि हितों से जोड़कर देखा जा रहा है।

डिजिटल टैक्स को लेकर भी रुख बदला गया है। पहले फैक्टशीट में कहा गया था, “भारत अपने डिजिटल सेवा कर को हटाएगा भेदभावपूर्ण या बोझिल प्रथाओं से निपटने के लिए मजबूत द्विपक्षीय डिजिटल व्यापार नियमों पर बातचीत करने की प्रतिबद्धता जताई है।”

संशोधित फैक्टशीट में अब यह नहीं कहा गया है कि “भारत डिजिटल सेवा कर हटाएगा।” इसके बजाय केवल यह उल्लेख है कि “भारत ने मजबूत द्विपक्षीय डिजिटल व्यापार नियमों पर बातचीत करने की प्रतिबद्धता जताई है।”

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा घोषित की थी, जिसके तहत दोनों देश आयात शुल्क घटाकर द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देंगे। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। इसके बदले भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कई खाद्य-कृषि वस्तुओं पर शुल्क समाप्त या काफी हद तक कम करेगा।

दोनों देशों के संयुक्त बयान के अनुसार, भारत अगले पांच वर्षों में ऊर्जा, विमान और विमान कलपुर्जे, कीमती धातुएं, तकनीकी उत्पाद और कोकिंग कोयला सहित लगभग 500 अरब अमेरिकी डॉलर के उत्पाद खरीदने की योजना बना रहा है।

इस बीच, समझौते के अंतिम चरण में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त में लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क को भी हटा दिया है, जो रूस से तेल खरीदने के चलते भारत पर लगाया गया था। व्हाइट हाउस के अनुसार, भारत ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं और मॉस्को से सीधे या परोक्ष रूप से तेल आयात रोकने की प्रतिबद्धता जताई है।

भारत और अमेरिका के बीच अंतिम व्यापार समझौते पर इस वर्ष मध्य मार्च तक हस्ताक्षर होने की संभावना है, लेकिन फैक्टशीट में किए गए ये संशोधन यह संकेत देते हैं कि भारत ने अमेरिका से सबसे बढ़िया समझौता पाया है।

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