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तकनीक से आगे सोच: केरल का एआई मॉडल जनहित और विकास पर केंद्रित!

राज्य का उभरता हुआ दृष्टिकोण डिजिटल बुनियादी ढांचे के निर्माण से आगे बढ़कर उन्नत तकनीकों के जरिए ठोस सार्वजनिक और आर्थिक परिणाम हासिल करने पर केंद्रित है।

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब केवल एक चर्चा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि शासन और अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनने की ओर बढ़ रहा है। इसी को देखते हुए केरल सरकार एआई को शासन सुधार और आर्थिक रणनीति का अहम चालक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

राज्य का उभरता हुआ दृष्टिकोण डिजिटल बुनियादी ढांचे के निर्माण से आगे बढ़कर उन्नत तकनीकों के जरिए ठोस सार्वजनिक और आर्थिक परिणाम हासिल करने पर केंद्रित है।

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण को बदलने की अपार क्षमता है, लेकिन इसका विकास और उपयोग लोकतांत्रिक मूल्यों, नैतिक सिद्धांतों और डेटा सुरक्षा के अनुरूप होना चाहिए।”

केरल इस नए चरण में कई संरचनात्मक मजबूतियों के साथ प्रवेश कर रहा है। सार्वभौमिक ब्रॉडबैंड पहुंच के लिए के-फॉन, केरल स्टार्टअप मिशन और डिजिटल यूनिवर्सिटी जैसी पहलों ने पहले ही कनेक्टिविटी, प्रतिभा और नवाचार का मजबूत आधार तैयार कर दिया है।

अब चुनौती इस तैयारी को शासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर एआई अनुप्रयोगों में बदलने की है।

राज्य की नीति सोच भारत सरकार के इंडिया एआई मिशन जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के भी अनुरूप है। इंडिया एआई समिट 2026 के मद्देनज़र, केरल खुद को एआई-आधारित सार्वजनिक प्रणालियों के क्रियान्वयन केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। साथ ही, डिजिटल सेवाओं और प्लेटफॉर्म पर केंद्रित स्टार्टअप्स, निवेशकों और वैश्विक साझेदारियों को आकर्षित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

हालांकि केरल ऐतिहासिक रूप से बड़े निजी पूंजी निवेश को लेकर सतर्क रहा है, लेकिन उसकी असली ताकत कुशल मानव संसाधन, विश्वसनीय सार्वजनिक संस्थानों और हेल्थ टेक्नोलॉजी, गवर्नेंस प्लेटफॉर्म तथा साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में एआई-आधारित समाधानों की बढ़ती मांग में निहित है।

इन क्षेत्रों में ऐसे पायलट प्रोजेक्ट्स की संभावना है, जिन्हें आगे चलकर निर्यात योग्य सेवा मॉडल में बदला जा सकता है।

नीतिगत इरादों को वास्तविक परिणामों में बदलने के लिए एक्टिव खरीद ढांचे, स्पष्ट नियामक व्यवस्था और सरकार, शिक्षा जगत तथा स्टार्टअप्स के बीच गहरे सहयोग की जरूरत होगी। साथ ही, जरूरत से ज्यादा सतर्कता एक ऐसे क्षेत्र में नवाचार की गति को धीमा कर सकती है, जो तेजी से आगे बढ़ता है।

फिर भी, केरल की एआई रणनीति एक अलग पहचान बना रही है- यह केवल तकनीक को अपनाने की होड़ नहीं है, बल्कि यह तय करने की कोशिश है कि एआई किस तरह जनहित की सेवा कर सकता है और साथ ही नए आर्थिक अवसर भी खोल सकता है। यदि यह प्रयास सफल रहता है, तो केरल भारत की उभरती एआई अर्थव्यवस्था में एक विशिष्ट स्थान हासिल कर सकता है।

 
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