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Wednesday, October 28, 2026
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“यह ईरान के अस्तित्व का युद्ध है”

ईरान के उप विदेश मंत्री का नई दिल्ली के रायसीना डॉयलोग में बयान

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नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग 2026 के महत्वपूर्ण सत्र में ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबज़ादेह ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर खुलकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा संघर्ष ईरान के अस्तित्व की लड़ाई बन गया है और इसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया।

कातिबज़ादेह का यह बयान ऐसे समय आया है जब सप्ताहांत में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद क्षेत्र में सैन्य तनाव तेजी से बढ़ गया है। शुरुआती हमलों में ईरान के इस्लामी सुप्रीम लीडर अली खामनेई की मौत की खबरों के बाद हालात और अधिक गंभीर हो गए। इन घटनाओं के बाद ईरान और पश्चिमी देशों के बीच चल रही परमाणु समझौता बहाली की कोशिशें भी पूरी तरह ठप हो गई हैं।

दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ रही है। यह समुद्री मार्ग ऐसा चोकपॉइंट है जहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है।

हालांकि कातिबज़ादेह ने स्पष्ट किया कि ईरान ने अभी तक इस समुद्री मार्ग को औपचारिक रूप से बंद नहीं किया है। उन्होंने कहा, “उन्होंने समुद्री व्यापार के रास्ते बंद नहीं किए हैं – हमने ऐसा नहीं किया है। अगर हम उन्हें बंद करते हैं, तो हम इसकी घोषणा करेंगे… टैंकरों के न गुजरने का मुख्य कारण यह है कि बीमा कंपनियों ने जहाजों का बीमा करना बंद कर दिया है।”

रिपोर्टों के अनुसार, वैश्विक समुद्री बीमा कंपनियों ने फारस की खाड़ी को “टोटल लॉस जोन” घोषित कर दिया है।इसके कारण कई वाणिज्यिक टैंकरों ने इस मार्ग से गुजरना बंद कर दिया है।

कातिबज़ादेह ने कहा कि अमेरिका या इज़राइल के झंडे वाले जहाजों या उनकी मदद करने वाले जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जा रही है। हालांकि उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान अब भी क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने इज़राइली खुफिया एजेंसी मोसाद पर “फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन” कराने का आरोप लगाया। उनके अनुसार हाल के रिफाइनरी हमले और साइप्रस के पास हुई घटनाएं ईरान को समुद्री आतंकवाद के लिए दोषी ठहराने की साजिश हो सकती हैं।

कातिबज़ादेह ने दावा किया कि कुछ मोसाद से जुड़े समूहों को सऊदी अरब और बगदाद में पकड़ा गया है, जो ऐसे ऑपरेशन को अंजाम देने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ईरान इन घटनाओं से जुड़ी खुफिया जानकारी क्षेत्रीय साझेदार देशों के साथ साझा कर रहा है ताकि व्यापक समुद्री संघर्ष को रोका जा सके।

5 से 7 मार्च तक नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डॉयलोग भारत का प्रमुख भू-राजनीतिक सम्मेलन है, जिसका आयोजनऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन और विदेश मंत्रालय के सहयोग से किया जाता है।

इस मंच पर दिए गए कातिबज़ादेह के बयान ने संकेत दिया कि पश्चिम एशिया का संकट केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति और बिगड़ती है तो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

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