शशकासन दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘शशक’ यानी खरगोश और ‘आसन’ यानी मुद्रा। इस आसन में शरीर की आकृति खरगोश जैसी बन जाती है, इसलिए इसे शशकासन कहा जाता है।
आयुष मंत्रालय इसे रोजाना करने की सलाह देता है। शशकासन तनाव, चिंता और गुस्से को कम करने वाला एक प्रभावी योगासन है, जो मन को शांत करता है। यह पीठ के निचले हिस्से, रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन और पाचन तंत्र को सुधारने के साथ-साथ एड्रेनल ग्रंथि को नियंत्रित करने में सहायक है, जिससे यह बच्चों और वयस्कों के उत्तम स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।
इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर को कई तरह के लाभ मिलते हैं। यदि हो सके, तो अभ्यासकर्ता इसे शांत वातावरण में ही करें। इसे करने के लिए सबसे बेहतर योग मैट पर वज्रासन में बैठ जाएं। आपकी रीढ़ सीधी होनी चाहिए। अब दोनों पैरों के घुटनों को धीरे-धीरे एक-दूसरे से दूर फैलाएं लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि पैरों के अंगूठे आपस में मिले हुए रहें।
गहरी श्वास लेते हुए अपनी दोनों हथेलियों को घुटनों के बीच जमीन पर रखें। अब धीरे-धीरे श्वास छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें और अपनी ठुड्डी को जमीन पर टिकाने का प्रयास करें।
इसे करना बेहद आसान है। करने के लिए सबसे पहले अभ्यासकर्ता योगा मैट पर व्रजासन में बैठ जाएं (पैर मोड़कर बैठें और रीढ़ की हड्डी सीधी होनी चाहिए)। अब गहरी सांस भरते हुए हाथों को ऊपर की ओर ले जाते हुए शरीर को धीरे-धीरे नीचे की ओर ले जाएं।



