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Sunday, January 4, 2026
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भारत की कड़ी प्रतिक्रिया पर ट्रंप के गोलमोल जवाब: “मुझे नहीं पता… जांच करूंगा”

अमेरिका को दिखाया आईना

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रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर टैरिफ लगाने की धमकी देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब खुद सवालों के घेरे में हैं। जब भारत ने अमेरिका द्वारा रूस से यूरेनियम, पैलेडियम और उर्वरकों के आयात का मुद्दा उठाया, तो ट्रंप ने हैरान करने वाला जवाब देते हुए कहा, “मुझे इसके बारे में कुछ नहीं पता। हमें इसे जांचना होगा।”

मंगलवार (5 अगस्त) को वाइट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान समाचार एजेंसी ANI ने ट्रंप से भारत के दावों पर सवाल किया। भारत ने दावा किया था कि अमेरिका रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, पैलेडियम, उर्वरक और अन्य रासायनिक उत्पाद अपनी परमाणु और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योगों के लिए आयात करता है। हालांकि ट्रंप इस पर स्पष्ट जवाब देने से बचते दिखें और जांच का हवाला देकर बात टाल दी।

ट्रंप ने इससे एक दिन पहले सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर लिखा था, “भारत न केवल रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है, बल्कि इसे खुले बाजार में मुनाफे के लिए बेच भी रहा है। उन्हें यूक्रेन में रूसी युद्ध मशीन से मरने वाले लोगों की कोई परवाह नहीं। इसलिए मैं भारत पर अमेरिका को दी जाने वाली टैरिफ में भारी बढ़ोतरी करूंगा।”

भारत ने ट्रंप के इस बयान को अनुचित और अतार्किक करार देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि रूस से ऊर्जा आयात देश की ऊर्जा सुरक्षा और बाजार की जरूरतों के अनुसार किया गया है। बयान में यह भी बताया गया कि पश्चिमी देशों ने यूक्रेन युद्ध के बाद अपनी पारंपरिक आपूर्ति यूरोप की ओर मोड़ दी थी और उस समय अमेरिका ने ही भारत को वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिर बनाए रखने के लिए रूस से तेल खरीदने की सहमति दी थी।

भारत ने दो टूक कहा, “हमें हैरानी होती है जब वे देश जो खुद रूस से व्यापार कर रहे हैं, भारत की आलोचना करते हैं। वह भी तब, जब उनके पास कोई राष्ट्रीय मजबूरी भी नहीं है।” भारत ने यह भी बताया कि अमेरिका न केवल रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड (परमाणु ऊर्जा के लिए), पैलेडियम (ईवी उद्योग के लिए), बल्कि उर्वरक और अन्य रासायनिक उत्पाद भी आयात करता है। वहीं, यूरोपीय संघ का रूस के साथ व्यापार वर्ष 2024 में 67.5 बिलियन यूरो तक पहुंच चुका है, जिसमें 16.5 मिलियन टन एलएनजी भी शामिल है।

भारत ने साफ किया कि वह किसी दबाव में नहीं आएगा और अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। विदेश मंत्रालय ने कहा, “किसी भी बड़े अर्थतंत्र की तरह, भारत अपनी आर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी उपाय करेगा।”

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