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Tuesday, June 9, 2026
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विरोध प्रदर्शनों के बीच ट्रंप का बड़ा कदम: कृषि, होटल, रेस्तरां सेक्टर पर छापे रोकने का आदेश

‘नॉन-क्रिमिनल’ प्रवासियों की गिरफ्तारी पर भी रोक, रिपोर्ट में खुलासा

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डिपोर्टेशन अभियान को लेकर अपनी नीति में बड़ा बदलाव करते हुए कृषि, होटल और रेस्तरां उद्योगों पर इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) की छापेमारी रोकने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब दक्षिणी कैलिफोर्निया में हाल ही में हुए छापों के बाद प्रवासी विरोध प्रदर्शनों ने जोर पकड़ लिया है।

‘न्यू यॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन को यह चिंता थी कि बड़े पैमाने पर चल रही डिपोर्टेशन कार्रवाइयों से उनके चुनावी आधार को नुकसान हो सकता है, खासकर कृषि और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में, जो उनके लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

आईसीई के वरिष्ठ अधिकारी टैटम किंग द्वारा विभागीय अधिकारियों को भेजे गए ईमेल में लिखा गया,”आज से प्रभावी रूप से एग्रीकल्चर (जैसे एक्वाकल्चर और मीट पैकिंग प्लांट्स), रेस्तरां और ऑपरेशन होटलों से संबंधित सभी वर्क साइट एनफोर्समेंट इन्वेस्टिगेशन/ऑपरेशन रोक दिए जाएं।”

ट्रंप के निर्देश के बाद ICE एजेंटों को यह भी स्पष्ट किया गया है कि वे अब ‘नॉन क्रिमिनल कोलेट्रल’ यानी बिना अपराध के अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों को हिरासत में नहीं लेंगे। यह निर्णय उन प्रवासियों के लिए राहत भरा है, जिनके पास वैध कागजात नहीं हैं, पर जिनका आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

हालांकि, इस आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि जो जांच मानव तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और नशीली दवाओं की तस्करी से जुड़ी है, वह जारी रहेगी।

यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी की प्रवक्ता ट्रिसिया मैकलॉघलिन ने बयान जारी कर कहा.”हम राष्ट्रपति के निर्देशों का पालन करेंगे और अमेरिका की सड़कों से अपराधी अवैध प्रवासियों को हटाने के लिए काम करना जारी रखेंगे।”

यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब हाल ही में ICE और अन्य फेडरल एजेंसियों ने दक्षिणी कैलिफोर्निया के कई स्थानों पर छापेमारी की थी, जिनका कड़ा विरोध किया गया। मानवाधिकार संगठनों और प्रवासी समूहों ने इसे अनुचित और असंवेदनशील करार दिया था।

डोनाल्ड ट्रंप के इस निर्णय को चुनावी रणनीति और व्यवसायिक दबावों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि आलोचक इसे अस्थायी राहत मान रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि प्रवासी नीति में स्थायी सुधार किया जाए।

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